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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए - ..... वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।

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प्रश्न

निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

..... वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।

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उत्तर

इन पंक्तियों में लेखक का आशय है कि शैलेन्द्र एक ऐसे कवि थे जो जीवन में आदर्शों और भावनाओं को सर्वोपरि मानते थे। जब उन्होंने भावनाओं, संवेदनाओं व साहित्य की विधाओं के आधार पर 'तीसरी कसम' फ़िल्म का निर्माण किया तो उनका उद्देश्य केवल आत्मसंतुष्टि था न कि धन कमाना।

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तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
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अध्याय 2.4: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ८५]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
अध्याय 2.4 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
प्रश्न-अभ्यास | Q (ग) 1. | पृष्ठ ८५

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क्र.सं. फ़िल्म का नाम साहित्यिक रचना भाषा रचनाकार
1. देवदास देवदास बंगला शरत्‌चंद्र
2. ............. ............. ............. .............
3. ............. ............. ............. .............
4. ............. ............. ............. .............

एक निर्माता के रूप में बड़े व्यावसायिक सा- युवा भी चकर क्यों खा जाते हैं?


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