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प्रश्न
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
..... वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।
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उत्तर
इन पंक्तियों में लेखक का आशय है कि शैलेन्द्र एक ऐसे कवि थे जो जीवन में आदर्शों और भावनाओं को सर्वोपरि मानते थे। जब उन्होंने भावनाओं, संवेदनाओं व साहित्य की विधाओं के आधार पर 'तीसरी कसम' फ़िल्म का निर्माण किया तो उनका उद्देश्य केवल आत्मसंतुष्टि था न कि धन कमाना।
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| क्र.सं. | फ़िल्म का नाम | साहित्यिक रचना | भाषा | रचनाकार |
|---|---|---|---|---|
| 1. | देवदास | देवदास | बंगला | शरत्चंद्र |
| 2. | ............. | ............. | ............. | ............. |
| 3. | ............. | ............. | ............. | ............. |
| 4. | ............. | ............. | ............. | ............. |
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