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निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए - 'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया। स्पष्ट कीजिए।

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Question

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -

'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया। स्पष्ट कीजिए।

Short/Brief Note
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Solution

राजकपूर अभिनय में प्रवीण थे। वे पात्र को अपने ऊपर हावी नही होने देते थे बल्कि उसको जीवंत कर देते थे। 'तीसरी कसम' में भी हीरामन पर राजकपूर हावी नही था बल्कि राजकपूर ने हीरामन को आत्मा दे दी थी। उसका उकड़ू बैठना, नौटंकी की बाई में अपनापन खोजना, गीतगाता गाडीवान, सरल देहाती मासूमियत को चरम सीमा तक ले जाते हैं। इस तरह उनका महिमामय व्यक्तित्व हीरामन की आत्मा में उतर गया।

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तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
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Chapter 2.4: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र - प्रश्न-अभ्यास [Page 85]

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NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 2.4 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
प्रश्न-अभ्यास | Q (ख) 2. | Page 85

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

शैलेंद्र ने कितनी फ़िल्में बनाईं?


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों के नाम बताइए।


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

फ़िल्म 'तीसरी कसम' का निर्माण किसने किया था?


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को किस तरह का कलाकार मानते थे?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −

'तीसरी कसम' फ़िल्म को सेल्यूलाइड पर लिखी कविता क्यों कहा गया है?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −

'तीसरी कसम' फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −

फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्लोरिफ़ाई क्यों कर दिया जाता है।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -

राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह करने पर भी शैलेन्द्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -

शैलेन्द्र के गीतों की क्या विशेषताएँ हैं। अपने शब्दों में लिखिए।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

..... वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

उनका यह दृढ़ मतंव्य था कि दर्शकों की रूचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्त्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रूचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।


फ़िल्मों के संदर्भ में आपने अकसर यह सुना होगा-‘जो बात पहले की फ़िल्मों में थी, वह अब कहाँ’। वतर्ममान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में क्या समानता और अंतर है? कक्षा में चर्चा कीजिए।


लोकगीत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। तीसरी कसम’ फ़िल्म में लोकगीतों का प्रयोग किया गया है। आप भी अपने क्षेत्र के प्रचलित दो-तीन लोकगीतों को एकत्र कर परियोजना कॉपी पर लिखिए।


एक निर्माता के रूप में बड़े व्यावसायिक सा- युवा भी चकर क्यों खा जाते हैं?


राजकपूर ने शैलेंद्र के साथ किस तरह यारउन्ना मस्ती की?


शैलेंद्र ने अच्छी फ़िल्म बनाने के लिए दवा किया?


शैलेंद्र द्वारा बनाई गई फ़िल्म चल रहीं, इसके कारण क्या थे?


निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-

'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की। उनका ख्याल था कि दर्शक 'चार दिशाएँ' तो समझ सकते हैं- 'दस दिशाएँ' नहीं। लेकिन शैलेंद्र परिवर्तन के लिए तैयार नहीं हुए। उनका दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करें और उनका यकीन गलत नहीं था। यही नहीं, वे बहुत अच्छे गीत भी जो उन्होंने लिखे बेहद लोकप्रिय हुए। शैलेंद्र ने झूठे अभिजात्य को कभी नहीं अपनाया। उनके गीत भाव-प्रवण थे- दुरुह नहीं। 'मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंगलिस्तानी, सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी' - यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे। शांत नदी का प्रवाह और समुद्र की गहराई लिए हुए। यहीं विशेषता उनकी ज़िंदगी की थी और यहीं उन्होंने अपनी फ़िल्म के द्वारा भी साबित किया था।
  1. गीत 'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की क्योंकि उनके अनुसार -
    (क) दस दिशाओं का गहन ज्ञान दर्शकों को नहीं होगा।
    (ख) इससे दर्शकों की रुचियों का परिष्कार नहीं होगा।
    (ग) जागरूक दर्शक ऐसी स्पष्ट बातें पसंद नहीं करते थे।
    (घ) दर्शकों की रुचि के लिए उन पर उथलापन नहीं थोपना चाहिए।

  2. 'उनका यह दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।'
    कथन के माध्यम से ज्ञात होता है कि शैलेंद्र हैं-
    (क) दृढ़निश्चयी, सफल फ़िल्म निर्माता व कवि
    (ख) सफल फ़िल्म निर्माता, गीतकार व कवि
    (ग) समाज-सुधारक, कर्मयोगी गीतकार व कवि
    (घ) आदर्शवादी, उच्चकोटि के गीतकार व कवि

  3. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    कथन (A) - उनके गीत भाव-प्रवण थे- दुरूह नहीं।
    कारण (R) - शैलेंद्र के द्वारा लिखे गीत भावनाओं से ओत-प्रोत थे, उनमें गहराई थी। गीतों की भाषा सहज, सरल थी, क्लिष्ट नहीं थी।

    (क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
    (ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
    (ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

  4. 'मेरा जूता है जापानी...... 'यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे। लेखक द्वारा ऐसा कहा जाना दर्शाता है, शैलेंद्र के प्रति उनका -
    (क) कर्तव्यबोध
    (ख) मैत्रीभाव
    (ग) व्यक्तित्व
    (घ) अवलोकन

  5. गद्यांश के आधार पर शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप मिलती है कि वे थे -
    (क) बेहद गंभीर, उदार, दृढ इच्छाशक्ति और संकीर्णहदय
    (ख) बेहद गंभीर, उदार, कृपण और संकीर्णहृदय
    (ग) बेहद गंभीर, आवुक, कृपण और दृढ इच्छाशक्ति
    (घ) बेहद गंभीर, उदार, दृढ इच्छाशक्ति और भावुक

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए:

   राज कपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफ़लता के खतरों से आगाह भी किया। पर वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी, जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी। 'तीसरी कसम' कितनी ही महान्‌ फ़िल्म क्यों न रही हो, लेकिनक यह एक दुःखद सत्य है कि इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले। बावजूद इसके कि “तीसरी कसम' में राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे नामजद सितारे थे, शंकर-जयकिशन का संगीत था, जिनकी लोकप्रियता उन दिनों सातवें आसमान पर थी और इसके गीत भी फ़िल्म के प्रदर्शन के पूर्व ही बेहद लोकप्रिय हो चुके थे, लेकिन इस फ़िल्म को खरीदने वाला कोई नहीं था। दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले की समझ से परे थी। उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज नहीं थी।
  1. राज कपूर ने शैलेंद्र को किस बात से आगाह किया था?
    (a) फ़िल्म का किसी को समझ न आने वाली बात से।
    (b) फ़िल्म से कोई आर्थिक लाभ न मिलने वाली बात से।
    (c) फ़िल्म निर्माण में होने वाली परेशानियों से।
    (d) फ़िल्म की संभावित असफ़लता के खतरों से।
  2. शैलेंद्र को किस प्रकार का व्यक्ति माना जा सकता है?
    (a) कुशल फ़िल्म निर्माता
    (b) प्रसिद्ध गीतकार
    (c) आदर्शवादी भावुक कवि
    (d) आत्म-संतुष्ट व्यक्ति
  3. 'तीसरी कसम' फिल्म का दुःखद सत्य क्या था?
    (a) फ़िल्म के लिए खरीददार का न मिलना।
    (b) लोगों का फ़िल्म को न समझ पाना।
    (c) फ़िल्म का रूपहले पर्दे पर न पहुँच पाना।
    (d) फ़िल्म को प्रसिद्धि न मिल पाना।
  4. गंद्यांश में आई पंक्ति - 'दो से चार बनाने का गणित' - का अर्थ है:
    (a) अधिक-से-अधिक धन कमाना।
    (b) संख्याओं को जोड़ने का हिसाब।
    (c) अधिक-से-अधिक मुनाफ़ा कमाना।
    (d) संख्याओं को गुणा करने का हिसाब।
  5. “उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी।” पंक्ति का आशय है -
    (a) यह करुणा अनुभूति का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
    (b) यह करुणा बुद्धि का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
    (c) यह करुणा हृदय का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
    (d) यह करुणा भावना का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।

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