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निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए - 'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया। स्पष्ट कीजिए। - Hindi Course - B

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Question

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया। स्पष्ट कीजिए।

Short/Brief Note
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Solution

राजकपूर अभिनय में प्रवीण थे। वे पात्र को अपने ऊपर हावी नही होने देते थे बल्कि उसको जीवंत कर देते थे। 'तीसरी कसम' में भी हीरामन पर राजकपूर हावी नही था बल्कि राजकपूर ने हीरामन को आत्मा दे दी थी। उसका उकड़ू बैठना, नौटंकी की बाई में अपनापन खोजना, गीतगाता गाडीवान, सरल देहाती मासूमियत को चरम सीमा तक ले जाते हैं। इस तरह उनका महिमामय व्यक्तित्व हीरामन की आत्मा में उतर गया।

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तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
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फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को किस तरह का कलाकार मानते थे?


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निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है।


फणीश्वरनाथ रेणु की किस कहानी पर ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म आधारित है, जानकारी प्राप्त कीजिए और मूल रचना पढ़िए।


फ़िल्मों के संदर्भ में आपने अकसर यह सुना होगा-‘जो बात पहले की फ़िल्मों में थी, वह अब कहाँ’। वतर्ममान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में क्या समानता और अंतर है? कक्षा में चर्चा कीजिए।


‘तीसरी कसम’ जैसी और भी फ़िल्में हैं, जो किसी न किसी भाषा की साहित्यिक रचना पर बनी हैं। ऐसी फ़िल्मों की सूची निम्नांकित प्रपत्र के आधार पर तैयार करें।

क्र. सं फिल्म का नाम साहित्यिक रचना भाषा रचनाकार
1. देवदास देवदास बंगला शरतचंद्र
2. ______ ______ ______ ______
3. ______ ______ ______ ______

संगम की सफलता से उत्साहित राजकपूर ने कन-सा कदम उठाया?


शैलेंद्र ने अच्छी फ़िल्म बनाने के लिए दवा किया?


शैलेंद्र द्वारा बनाई गई फ़िल्म चल रहीं, इसके कारण क्या थे?


‘तीसरी कसम’ में राजकपूर और वहीदा रहमान का अभिनय लाजवाब था। स्पष्ट कीजिए।


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