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Question
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है−कैसे? स्पष्ट कीजिए।
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Solution
शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है। शैलेन्द्र ने झूठे अभिजात्य को कभी नहीं अपनाया। उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरुह नहीं। उनका कहना था कि कलाकार का यह कर्त्तव्य है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे। उनके लिखे गए गीतों में बनावटीपन नहीं था। उनके गीतों में शांत नदी का प्रवाह भी था और गीतों का भाव समुद्र की तरह गहरा था। यही विशेषता उनकी ज़िंदगी की थी और यही उन्होंने अपनी फिल्म के द्वारा भी साबित किया।
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| क्र.सं. | फ़िल्म का नाम | साहित्यिक रचना | भाषा | रचनाकार |
|---|---|---|---|---|
| 1. | देवदास | देवदास | बंगला | शरत्चंद्र |
| 2. | ............. | ............. | ............. | ............. |
| 3. | ............. | ............. | ............. | ............. |
| 4. | ............. | ............. | ............. | ............. |
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निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-
| 'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की। उनका ख्याल था कि दर्शक 'चार दिशाएँ' तो समझ सकते हैं- 'दस दिशाएँ' नहीं। लेकिन शैलेंद्र परिवर्तन के लिए तैयार नहीं हुए। उनका दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करें और उनका यकीन गलत नहीं था। यही नहीं, वे बहुत अच्छे गीत भी जो उन्होंने लिखे बेहद लोकप्रिय हुए। शैलेंद्र ने झूठे अभिजात्य को कभी नहीं अपनाया। उनके गीत भाव-प्रवण थे- दुरुह नहीं। 'मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंगलिस्तानी, सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी' - यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे। शांत नदी का प्रवाह और समुद्र की गहराई लिए हुए। यहीं विशेषता उनकी ज़िंदगी की थी और यहीं उन्होंने अपनी फ़िल्म के द्वारा भी साबित किया था। |
- गीत 'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की क्योंकि उनके अनुसार -
(क) दस दिशाओं का गहन ज्ञान दर्शकों को नहीं होगा।
(ख) इससे दर्शकों की रुचियों का परिष्कार नहीं होगा।
(ग) जागरूक दर्शक ऐसी स्पष्ट बातें पसंद नहीं करते थे।
(घ) दर्शकों की रुचि के लिए उन पर उथलापन नहीं थोपना चाहिए। - 'उनका यह दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।'
कथन के माध्यम से ज्ञात होता है कि शैलेंद्र हैं-
(क) दृढ़निश्चयी, सफल फ़िल्म निर्माता व कवि
(ख) सफल फ़िल्म निर्माता, गीतकार व कवि
(ग) समाज-सुधारक, कर्मयोगी गीतकार व कवि
(घ) आदर्शवादी, उच्चकोटि के गीतकार व कवि - निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
कथन (A) - उनके गीत भाव-प्रवण थे- दुरूह नहीं।
कारण (R) - शैलेंद्र के द्वारा लिखे गीत भावनाओं से ओत-प्रोत थे, उनमें गहराई थी। गीतों की भाषा सहज, सरल थी, क्लिष्ट नहीं थी।
(क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
(ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
(ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
(घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है। - 'मेरा जूता है जापानी...... 'यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे। लेखक द्वारा ऐसा कहा जाना दर्शाता है, शैलेंद्र के प्रति उनका -
(क) कर्तव्यबोध
(ख) मैत्रीभाव
(ग) व्यक्तित्व
(घ) अवलोकन - गद्यांश के आधार पर शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप मिलती है कि वे थे -
(क) बेहद गंभीर, उदार, दृढ इच्छाशक्ति और संकीर्णहदय
(ख) बेहद गंभीर, उदार, कृपण और संकीर्णहृदय
(ग) बेहद गंभीर, आवुक, कृपण और दृढ इच्छाशक्ति
(घ) बेहद गंभीर, उदार, दृढ इच्छाशक्ति और भावुक
उत्कृष्ट होते हए भी 'तीसरी कसम' फ़िल्म सिनेमाघरों में क्यो नहीं चली?
