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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए - व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।

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Questions

निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:

आशय स्पष्ट कीजिए - 'व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।'

One Line Answer
Short/Brief Note
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Solution 1

इसमें शैलेन्द्र ने बताया है कि दुख मनुष्य को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जब मुश्किल आती है तो वह उससे छुटकारा पाने की बात सोचने लगता है। अर्थात वह जीवन में हार नहीं मानता है।

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Solution 2

'व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।' यह प्रस्तावना सही है क्योंकि व्यथा और कठिनाइयाँ जीवन का हिस्सा हैं। मनुष्य जिस भी समस्या या दुख से गुजरता है, वह उससे सीखता है और समस्याओं से निपटने की नई दिशाओं को खोजता है। व्यक्ति अपनी इच्छाशक्ति और सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ता है और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करता है। व्यथा से निराश नहीं होना बल्कि उससे सीखना और समस्याओं का सामना करना महत्वपूर्ण है।

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Notes

छात्र प्रश्न और गुणों के आधार पर उत्तर लिख सकते है।

तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
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Chapter 2.4: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र - लिखित (ग) [Page 95]

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NCERT Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
Chapter 2.4 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
लिखित (ग) | Q 3 | Page 95

RELATED QUESTIONS

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों के नाम बताइए।


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

राजकपूर ने 'मेरा नाम जोकर' के निर्माण के समय किस बात की कल्पना भी नहीं की थी?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए 

फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्लोरिफ़ाई क्यों कर दिया जाता है।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह करने पर भी शैलेन्द्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

फ़िल्म निर्माता के रूप में शैलेन्द्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है−कैसे? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

लेखक के इस कथन से कि 'तीसरी कसम' फ़िल्म कोई सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था, आप कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।


फ़िल्मों के संदर्भ में आपने अकसर यह सुना होगा-‘जो बात पहले की फ़िल्मों में थी, वह अब कहाँ’। वतर्ममान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में क्या समानता और अंतर है? कक्षा में चर्चा कीजिए।


राजकपूर ने शैलेंद्र के साथ किस तरह यारउन्ना मस्ती की?


शैलेंद्र ने अच्छी फ़िल्म बनाने के लिए दवा किया?


‘तीसरी कसम’ जैसी फ़िल्म बनाने के पीछे शैलेंद्र की मंशा क्या थी?


‘तीसरी कसम’ में राजकपूर और वहीदा रहमान का अभिनय लाजवाब था। स्पष्ट कीजिए।


हिंदी फ़िल्म जगत में एक सार्थक और उद्देश्यपरक फ़िल्म बनाना कठिन और जोखिम का काम है।’ स्पष्ट कीजिए।


‘राजकपूर जिन्हें समीक्षक और कलामर्मज्ञ आँखों से बात करने वाला मानते हैं’ के आधार पर राजकपूर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।


निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए:

   राज कपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफ़लता के खतरों से आगाह भी किया। पर वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी, जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी। 'तीसरी कसम' कितनी ही महान्‌ फ़िल्म क्यों न रही हो, लेकिनक यह एक दुःखद सत्य है कि इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले। बावजूद इसके कि “तीसरी कसम' में राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे नामजद सितारे थे, शंकर-जयकिशन का संगीत था, जिनकी लोकप्रियता उन दिनों सातवें आसमान पर थी और इसके गीत भी फ़िल्म के प्रदर्शन के पूर्व ही बेहद लोकप्रिय हो चुके थे, लेकिन इस फ़िल्म को खरीदने वाला कोई नहीं था। दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले की समझ से परे थी। उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज नहीं थी।
  1. राज कपूर ने शैलेंद्र को किस बात से आगाह किया था?
    (a) फ़िल्म का किसी को समझ न आने वाली बात से।
    (b) फ़िल्म से कोई आर्थिक लाभ न मिलने वाली बात से।
    (c) फ़िल्म निर्माण में होने वाली परेशानियों से।
    (d) फ़िल्म की संभावित असफ़लता के खतरों से।
  2. शैलेंद्र को किस प्रकार का व्यक्ति माना जा सकता है?
    (a) कुशल फ़िल्म निर्माता
    (b) प्रसिद्ध गीतकार
    (c) आदर्शवादी भावुक कवि
    (d) आत्म-संतुष्ट व्यक्ति
  3. 'तीसरी कसम' फिल्म का दुःखद सत्य क्या था?
    (a) फ़िल्म के लिए खरीददार का न मिलना।
    (b) लोगों का फ़िल्म को न समझ पाना।
    (c) फ़िल्म का रूपहले पर्दे पर न पहुँच पाना।
    (d) फ़िल्म को प्रसिद्धि न मिल पाना।
  4. गंद्यांश में आई पंक्ति - 'दो से चार बनाने का गणित' - का अर्थ है:
    (a) अधिक-से-अधिक धन कमाना।
    (b) संख्याओं को जोड़ने का हिसाब।
    (c) अधिक-से-अधिक मुनाफ़ा कमाना।
    (d) संख्याओं को गुणा करने का हिसाब।
  5. “उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी।” पंक्ति का आशय है -
    (a) यह करुणा अनुभूति का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
    (b) यह करुणा बुद्धि का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
    (c) यह करुणा हृदय का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
    (d) यह करुणा भावना का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।

उत्कृष्ट होते हए भी 'तीसरी कसम' फ़िल्म सिनेमाघरों में क्यो नहीं चली?


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