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प्रश्न
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए:
आशय स्पष्ट कीजिए - 'व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।'
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उत्तर १
इसमें शैलेन्द्र ने बताया है कि दुख मनुष्य को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। जब मुश्किल आती है तो वह उससे छुटकारा पाने की बात सोचने लगता है। अर्थात वह जीवन में हार नहीं मानता है।
उत्तर २
'व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।' यह प्रस्तावना सही है क्योंकि व्यथा और कठिनाइयाँ जीवन का हिस्सा हैं। मनुष्य जिस भी समस्या या दुख से गुजरता है, वह उससे सीखता है और समस्याओं से निपटने की नई दिशाओं को खोजता है। व्यक्ति अपनी इच्छाशक्ति और सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ता है और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करता है। व्यथा से निराश नहीं होना बल्कि उससे सीखना और समस्याओं का सामना करना महत्वपूर्ण है।
Notes
छात्र प्रश्न और गुणों के आधार पर उत्तर लिख सकते है।
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| क्र. सं | फिल्म का नाम | साहित्यिक रचना | भाषा | रचनाकार |
| 1. | देवदास | देवदास | बंगला | शरतचंद्र |
| 2. | ______ | ______ | ______ | ______ |
| 3. | ______ | ______ | ______ | ______ |
संगम की सफलता से उत्साहित राजकपूर ने कन-सा कदम उठाया?
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शैलेंद्र ने अच्छी फ़िल्म बनाने के लिए दवा किया?
हिंदी फ़िल्म जगत में एक सार्थक और उद्देश्यपरक फ़िल्म बनाना कठिन और जोखिम का काम है।’ स्पष्ट कीजिए।
‘राजकपूर जिन्हें समीक्षक और कलामर्मज्ञ आँखों से बात करने वाला मानते हैं’ के आधार पर राजकपूर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
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