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प्रश्न
‘राजकपूर जिन्हें समीक्षक और कलामर्मज्ञ आँखों से बात करने वाला मानते हैं’ के आधार पर राजकपूर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।
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उत्तर
राजकपूर हिंदी फ़िल्म जगत के सशक्त अभिनेता थे। अभिनय की दुनिया में आने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे उत्तरोत्तर सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ते गए और अपने अभिनय से नित नई ऊचाईयाँ छूते रहे। संगम फ़िल्म की अद्भुत सफलता से उत्साहित होकर उन्होंने एक साथ चार फ़िल्मों के निर्माण की घोषणा की। ये फ़िल्में सफल भी रही। इसी बीच राजकपूर अभिनीत फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ के बाद उन्हें एशिया के शोमैन के रूप में जाना जाने लगा। इनका अपना व्यक्तित्व लोगों के लिए किंवदंती बन चुका था। वे आँखों से बात करने वाले कलाकार जो हर भूमिका में जान फेंक देते थे। वे अपने रोल में इतना खो जाते थे कि उनमें राजकपूर कहीं नज़र नहीं आता था। वे सच्चे इंसान और मित्र भी थे, जिन्होंने अपने मित्र शैलेंद्र की फ़िल्म में मात्र एक रुपया पारिश्रमिक लेकर काम किया और मित्रता का आदर्श प्रस्तुत किया।
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दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है।
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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए:
| राज कपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफ़लता के खतरों से आगाह भी किया। पर वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी, जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी। 'तीसरी कसम' कितनी ही महान् फ़िल्म क्यों न रही हो, लेकिनक यह एक दुःखद सत्य है कि इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले। बावजूद इसके कि “तीसरी कसम' में राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे नामजद सितारे थे, शंकर-जयकिशन का संगीत था, जिनकी लोकप्रियता उन दिनों सातवें आसमान पर थी और इसके गीत भी फ़िल्म के प्रदर्शन के पूर्व ही बेहद लोकप्रिय हो चुके थे, लेकिन इस फ़िल्म को खरीदने वाला कोई नहीं था। दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले की समझ से परे थी। उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज नहीं थी। |
- राज कपूर ने शैलेंद्र को किस बात से आगाह किया था?
(a) फ़िल्म का किसी को समझ न आने वाली बात से।
(b) फ़िल्म से कोई आर्थिक लाभ न मिलने वाली बात से।
(c) फ़िल्म निर्माण में होने वाली परेशानियों से।
(d) फ़िल्म की संभावित असफ़लता के खतरों से। - शैलेंद्र को किस प्रकार का व्यक्ति माना जा सकता है?
(a) कुशल फ़िल्म निर्माता
(b) प्रसिद्ध गीतकार
(c) आदर्शवादी भावुक कवि
(d) आत्म-संतुष्ट व्यक्ति - 'तीसरी कसम' फिल्म का दुःखद सत्य क्या था?
(a) फ़िल्म के लिए खरीददार का न मिलना।
(b) लोगों का फ़िल्म को न समझ पाना।
(c) फ़िल्म का रूपहले पर्दे पर न पहुँच पाना।
(d) फ़िल्म को प्रसिद्धि न मिल पाना। - गंद्यांश में आई पंक्ति - 'दो से चार बनाने का गणित' - का अर्थ है:
(a) अधिक-से-अधिक धन कमाना।
(b) संख्याओं को जोड़ने का हिसाब।
(c) अधिक-से-अधिक मुनाफ़ा कमाना।
(d) संख्याओं को गुणा करने का हिसाब। - “उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी।” पंक्ति का आशय है -
(a) यह करुणा अनुभूति का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(b) यह करुणा बुद्धि का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(c) यह करुणा हृदय का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(d) यह करुणा भावना का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
उत्कृष्ट होते हए भी 'तीसरी कसम' फ़िल्म सिनेमाघरों में क्यो नहीं चली?
