Advertisements
Advertisements
Question
हिंदी फ़िल्म जगत में एक सार्थक और उद्देश्यपरक फ़िल्म बनाना कठिन और जोखिम का काम है।’ स्पष्ट कीजिए।
Advertisements
Solution
हिंदी फ़िल्म जगत की एक सार्थक और उद्देश्यपरक फ़िल्म है तीसरी कसम, जिसका निर्माण प्रसिद्ध गीतकार शैलेंद्र ने किया। इस फ़िल्म में राजकपूर और वहीदा रहमान जैसे प्रसिद्ध सितारों का सशक्त अभिनय था। अपने जमाने के मशहूर संगीतकार शंकर जयकिशन का संगीत था जिनकी लोकप्रियता उस समय सातवें आसमान पर थी। फ़िल्म के प्रदर्शन के पहले ही इसके सभी गीत लोकप्रिय हो चुके थे। इसके बाद भी इस महान फ़िल्म को कोई न तो खरीदने वाला था और न इसके वितरक मिले। यह फ़िल्म कब आई और कब चली गई मालूम ही न पड़ा, इसलिए ऐसी फ़िल्में बनाना जोखिमपूर्ण काम है।
RELATED QUESTIONS
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
शैलेंद्र ने कितनी फ़िल्में बनाईं?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों के नाम बताइए।
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
'तीसरी कसम' फ़िल्म के नायक व नायिकाओं के नाम बताइए और फ़िल्म में इन्होंने किन पात्रों का अभिनय किया है?
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को किस तरह का कलाकार मानते थे?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
'तीसरी कसम' फ़िल्म को सेल्यूलाइड पर लिखी कविता क्यों कहा गया है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
'तीसरी कसम' फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
'शैलेन्द्र ने राजकपूर की भावनाओं को शब्द दिए हैं' − इस कथन से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
फ़िल्म 'श्री 420' के गीत 'रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति क्यों की?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह करने पर भी शैलेन्द्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया। स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
..... वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।
फणीश्वरनाथ रेणु की किस कहानी पर ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म आधारित है, जानकारी प्राप्त कीजिए और मूल रचना पढ़िए।
लोकगीत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। तीसरी कसम’ फ़िल्म में लोकगीतों का प्रयोग किया गया है। आप भी अपने क्षेत्र के प्रचलित दो-तीन लोकगीतों को एकत्र कर परियोजना कॉपी पर लिखिए।
‘तीसरी कसम’ जैसी और भी फ़िल्में हैं, जो किसी न किसी भाषा की साहित्यिक रचना पर बनी हैं। ऐसी फ़िल्मों की सूची निम्नांकित प्रपत्र के आधार पर तैयार करें।
| क्र. सं | फिल्म का नाम | साहित्यिक रचना | भाषा | रचनाकार |
| 1. | देवदास | देवदास | बंगला | शरतचंद्र |
| 2. | ______ | ______ | ______ | ______ |
| 3. | ______ | ______ | ______ | ______ |
राजकपूर ने शैलेंद्र के साथ किस तरह यारउन्ना मस्ती की?
‘तीसरी कसम’ जैसी फ़िल्म बनाने के पीछे शैलेंद्र की मंशा क्या थी?
शैलेंद्र द्वारा बनाई गई फ़िल्म चल रहीं, इसके कारण क्या थे?
उत्कृष्ट होते हए भी 'तीसरी कसम' फ़िल्म सिनेमाघरों में क्यो नहीं चली?
