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निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए - शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है−कैसे? स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है−कैसे? स्पष्ट कीजिए।

टीपा लिहा
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उत्तर

शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है। शैलेन्द्र ने झूठे अभिजात्य को कभी नहीं अपनाया। उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरुह नहीं। उनका कहना था कि कलाकार का यह कर्त्तव्य है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे। उनके लिखे गए गीतों में बनावटीपन नहीं था। उनके गीतों में शांत नदी का प्रवाह भी था और गीतों का भाव समुद्र की तरह गहरा था। यही विशेषता उनकी ज़िंदगी की थी और यही उन्होंने अपनी फिल्म के द्वारा भी साबित किया।

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तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
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पाठ 2.4: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र - लिखित (ख) [पृष्ठ ९५]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 [English] Class 10
पाठ 2.4 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
लिखित (ख) | Q 6 | पृष्ठ ९५

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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरूह नहीं।


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‘तीसरी कसम’ जैसी और भी फ़िल्में हैं, जो किसी न किसी भाषा की साहित्यिक रचना पर बनी हैं। ऐसी फ़िल्मों की सूची निम्नांकित प्रपत्र के आधार पर तैयार करें।

क्र. सं फिल्म का नाम साहित्यिक रचना भाषा रचनाकार
1. देवदास देवदास बंगला शरतचंद्र
2. ______ ______ ______ ______
3. ______ ______ ______ ______

संगम की सफलता से उत्साहित राजकपूर ने कन-सा कदम उठाया?


‘तीसरी कसम’ जैसी फ़िल्म बनाने के पीछे शैलेंद्र की मंशा क्या थी?


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हिंदी फ़िल्म जगत में एक सार्थक और उद्देश्यपरक फ़िल्म बनाना कठिन और जोखिम का काम है।’ स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-

'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की। उनका ख्याल था कि दर्शक 'चार दिशाएँ' तो समझ सकते हैं- 'दस दिशाएँ' नहीं। लेकिन शैलेंद्र परिवर्तन के लिए तैयार नहीं हुए। उनका दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करें और उनका यकीन गलत नहीं था। यही नहीं, वे बहुत अच्छे गीत भी जो उन्होंने लिखे बेहद लोकप्रिय हुए। शैलेंद्र ने झूठे अभिजात्य को कभी नहीं अपनाया। उनके गीत भाव-प्रवण थे- दुरुह नहीं। 'मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंगलिस्तानी, सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी' - यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे। शांत नदी का प्रवाह और समुद्र की गहराई लिए हुए। यहीं विशेषता उनकी ज़िंदगी की थी और यहीं उन्होंने अपनी फ़िल्म के द्वारा भी साबित किया था।
  1. गीत 'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की क्योंकि उनके अनुसार -
    (क) दस दिशाओं का गहन ज्ञान दर्शकों को नहीं होगा।
    (ख) इससे दर्शकों की रुचियों का परिष्कार नहीं होगा।
    (ग) जागरूक दर्शक ऐसी स्पष्ट बातें पसंद नहीं करते थे।
    (घ) दर्शकों की रुचि के लिए उन पर उथलापन नहीं थोपना चाहिए।

  2. 'उनका यह दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।'
    कथन के माध्यम से ज्ञात होता है कि शैलेंद्र हैं-
    (क) दृढ़निश्चयी, सफल फ़िल्म निर्माता व कवि
    (ख) सफल फ़िल्म निर्माता, गीतकार व कवि
    (ग) समाज-सुधारक, कर्मयोगी गीतकार व कवि
    (घ) आदर्शवादी, उच्चकोटि के गीतकार व कवि

  3. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    कथन (A) - उनके गीत भाव-प्रवण थे- दुरूह नहीं।
    कारण (R) - शैलेंद्र के द्वारा लिखे गीत भावनाओं से ओत-प्रोत थे, उनमें गहराई थी। गीतों की भाषा सहज, सरल थी, क्लिष्ट नहीं थी।

    (क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
    (ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
    (ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

  4. 'मेरा जूता है जापानी...... 'यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे। लेखक द्वारा ऐसा कहा जाना दर्शाता है, शैलेंद्र के प्रति उनका -
    (क) कर्तव्यबोध
    (ख) मैत्रीभाव
    (ग) व्यक्तित्व
    (घ) अवलोकन

  5. गद्यांश के आधार पर शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप मिलती है कि वे थे -
    (क) बेहद गंभीर, उदार, दृढ इच्छाशक्ति और संकीर्णहदय
    (ख) बेहद गंभीर, उदार, कृपण और संकीर्णहृदय
    (ग) बेहद गंभीर, आवुक, कृपण और दृढ इच्छाशक्ति
    (घ) बेहद गंभीर, उदार, दृढ इच्छाशक्ति और भावुक

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