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निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए - लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि तीसरी कसम ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है?

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प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -

लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि तीसरी कसम ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है?

टीपा लिहा
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उत्तर

तीसरी कसम फ़िल्म फणीश्वरनाथ रेणु की पुस्तक 'मारे गए गुलफाम' पर आधारित है। शैलेंद्र ने पात्रों के व्यक्तित्व, प्रसंग,  घटनाओं में कहीं कोई परिवर्तन नहीं किया है। कहानी में दी गई छोटी-छोटी बारीकियाँ, छोटी-छोटी बातें फ़िल्म में पूरी तरह उतर कर आईं हैं। शैलेंद्र ने धन कमाने के लिए फ़िल्म नहीं बनाई थी। उनका उद्देश्य एक सुंदर कृति बनाना था। उन्होंने मूल कहानी को यथा रूप में प्रस्तुत किया है। उऩके योगदान से एक सुंदर फ़िल्म तीसरी कसम के रूप में हमारे सामने आई है। लेखक ने इसलिए कहा है कि तीसरी कसम ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत का न्याय किया है।

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तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
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पाठ 2.4: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ८५]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
पाठ 2.4 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
प्रश्न-अभ्यास | Q (ख) 3. | पृष्ठ ८५

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