मराठी

संगम की सफलता से उत्साहित राजकपूर ने कन-सा कदम उठाया?

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

संगम की सफलता से उत्साहित राजकपूर ने कन-सा कदम उठाया?

एका वाक्यात उत्तर
Advertisements

उत्तर

राजकपूर को संगम फ़िल्म से अद्भुत सफलता मिली। इससे उत्साहित होकर उन्होंने एक साथ चार फ़िल्मों के निर्माण की घोषणा की। ये फ़िल्में थीं-अजंता, मेरा नाम जोकर, मैं और मेरा दोस्त, सत्यम् शिवम् सुंदरम्।

shaalaa.com
तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?

संबंधित प्रश्‍न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

'तीसरी कसम' फ़िल्म को कौन-कौन से पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है?


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

शैलेंद्र ने कितनी फ़िल्में बनाईं?


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों के नाम बताइए।


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

राजकपूर की किस बात पर शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −

फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्लोरिफ़ाई क्यों कर दिया जाता है।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −

'शैलेन्द्र ने राजकपूर की भावनाओं को शब्द दिए हैं' − इस कथन से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −

लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -

राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह करने पर भी शैलेन्द्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -

लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि तीसरी कसम ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -

शैलेन्द्र के गीतों की क्या विशेषताएँ हैं। अपने शब्दों में लिखिए।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है।


राजकपूर ने शैलेंद्र के साथ अपनी मित्रता? निर्वाह कैसे किया?


‘तीसरी कसम’ जैसी फ़िल्म बनाने के पीछे शैलेंद्र की मंशा क्या थी?


‘रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी नयाँ’ इस पंक्ति के रेखांकित अंश पर किसे आपत्ति थी और क्यों?


‘राजकपूर जिन्हें समीक्षक और कलामर्मज्ञ आँखों से बात करने वाला मानते हैं’ के आधार पर राजकपूर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।


निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-

'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की। उनका ख्याल था कि दर्शक 'चार दिशाएँ' तो समझ सकते हैं- 'दस दिशाएँ' नहीं। लेकिन शैलेंद्र परिवर्तन के लिए तैयार नहीं हुए। उनका दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करें और उनका यकीन गलत नहीं था। यही नहीं, वे बहुत अच्छे गीत भी जो उन्होंने लिखे बेहद लोकप्रिय हुए। शैलेंद्र ने झूठे अभिजात्य को कभी नहीं अपनाया। उनके गीत भाव-प्रवण थे- दुरुह नहीं। 'मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंगलिस्तानी, सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी' - यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे। शांत नदी का प्रवाह और समुद्र की गहराई लिए हुए। यहीं विशेषता उनकी ज़िंदगी की थी और यहीं उन्होंने अपनी फ़िल्म के द्वारा भी साबित किया था।
  1. गीत 'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की क्योंकि उनके अनुसार -
    (क) दस दिशाओं का गहन ज्ञान दर्शकों को नहीं होगा।
    (ख) इससे दर्शकों की रुचियों का परिष्कार नहीं होगा।
    (ग) जागरूक दर्शक ऐसी स्पष्ट बातें पसंद नहीं करते थे।
    (घ) दर्शकों की रुचि के लिए उन पर उथलापन नहीं थोपना चाहिए।

  2. 'उनका यह दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।'
    कथन के माध्यम से ज्ञात होता है कि शैलेंद्र हैं-
    (क) दृढ़निश्चयी, सफल फ़िल्म निर्माता व कवि
    (ख) सफल फ़िल्म निर्माता, गीतकार व कवि
    (ग) समाज-सुधारक, कर्मयोगी गीतकार व कवि
    (घ) आदर्शवादी, उच्चकोटि के गीतकार व कवि

  3. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    कथन (A) - उनके गीत भाव-प्रवण थे- दुरूह नहीं।
    कारण (R) - शैलेंद्र के द्वारा लिखे गीत भावनाओं से ओत-प्रोत थे, उनमें गहराई थी। गीतों की भाषा सहज, सरल थी, क्लिष्ट नहीं थी।

    (क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
    (ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
    (ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

  4. 'मेरा जूता है जापानी...... 'यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे। लेखक द्वारा ऐसा कहा जाना दर्शाता है, शैलेंद्र के प्रति उनका -
    (क) कर्तव्यबोध
    (ख) मैत्रीभाव
    (ग) व्यक्तित्व
    (घ) अवलोकन

  5. गद्यांश के आधार पर शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप मिलती है कि वे थे -
    (क) बेहद गंभीर, उदार, दृढ इच्छाशक्ति और संकीर्णहदय
    (ख) बेहद गंभीर, उदार, कृपण और संकीर्णहृदय
    (ग) बेहद गंभीर, आवुक, कृपण और दृढ इच्छाशक्ति
    (घ) बेहद गंभीर, उदार, दृढ इच्छाशक्ति और भावुक

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×