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‘तीसरी कसम’ जैसी फ़िल्म बनाने के पीछे शैलेंद्र की मंशा क्या थी?

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प्रश्न

‘तीसरी कसम’ जैसी फ़िल्म बनाने के पीछे शैलेंद्र की मंशा क्या थी?

एका वाक्यात उत्तर
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उत्तर

शैलेंद्र कवि हृदय रखने वाले गीतकार थे। तीसरी कसम बनाने के पीछे उनकी मंशा यश या धनलिप्सा न थी। आत्म संतुष्टि के लिए ही उन्होंने फ़िल्म बनाई।

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तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
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पाठ 2.4: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र - अतिरिक्त प्रश्न

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
पाठ 2.4 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
अतिरिक्त प्रश्न | Q 6

संबंधित प्रश्‍न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

शैलेंद्र ने कितनी फ़िल्में बनाईं?


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों के नाम बताइए।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए 

'तीसरी कसम' फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए 

फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्लोरिफ़ाई क्यों कर दिया जाता है।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए 

'शैलेन्द्र ने राजकपूर की भावनाओं को शब्द दिए हैं' − इस कथन से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए 

लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि तीसरी कसम ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

लेखक के इस कथन से कि 'तीसरी कसम' फ़िल्म कोई सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था, आप कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

..... वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरूह नहीं।


समाचार पत्रों में फ़िल्मों की समीक्षा दी जाती है। किन्हीं तीन फ़िल्मों की समीक्षा पढ़िए और तीसरी कसम’ फ़िल्म को देखकर इस फ़िल्म की समीक्षा स्वयं लिखने का प्रयास कीजिए।


फ़िल्मों के संदर्भ में आपने अकसर यह सुना होगा-‘जो बात पहले की फ़िल्मों में थी, वह अब कहाँ’। वतर्ममान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में क्या समानता और अंतर है? कक्षा में चर्चा कीजिए।


लोकगीत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। तीसरी कसम’ फ़िल्म में लोकगीतों का प्रयोग किया गया है। आप भी अपने क्षेत्र के प्रचलित दो-तीन लोकगीतों को एकत्र कर परियोजना कॉपी पर लिखिए।


संगम की सफलता से उत्साहित राजकपूर ने कन-सा कदम उठाया?


राजकपूर ने शैलेंद्र के साथ किस तरह यारउन्ना मस्ती की?


शैलेंद्र द्वारा बनाई गई फ़िल्म चल रहीं, इसके कारण क्या थे?


निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए-

'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की। उनका ख्याल था कि दर्शक 'चार दिशाएँ' तो समझ सकते हैं- 'दस दिशाएँ' नहीं। लेकिन शैलेंद्र परिवर्तन के लिए तैयार नहीं हुए। उनका दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करें और उनका यकीन गलत नहीं था। यही नहीं, वे बहुत अच्छे गीत भी जो उन्होंने लिखे बेहद लोकप्रिय हुए। शैलेंद्र ने झूठे अभिजात्य को कभी नहीं अपनाया। उनके गीत भाव-प्रवण थे- दुरुह नहीं। 'मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंगलिस्तानी, सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी' - यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे। शांत नदी का प्रवाह और समुद्र की गहराई लिए हुए। यहीं विशेषता उनकी ज़िंदगी की थी और यहीं उन्होंने अपनी फ़िल्म के द्वारा भी साबित किया था।
  1. गीत 'रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति की क्योंकि उनके अनुसार -
    (क) दस दिशाओं का गहन ज्ञान दर्शकों को नहीं होगा।
    (ख) इससे दर्शकों की रुचियों का परिष्कार नहीं होगा।
    (ग) जागरूक दर्शक ऐसी स्पष्ट बातें पसंद नहीं करते थे।
    (घ) दर्शकों की रुचि के लिए उन पर उथलापन नहीं थोपना चाहिए।

  2. 'उनका यह दृढ़ मंतव्य था कि दर्शकों की रुचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।'
    कथन के माध्यम से ज्ञात होता है कि शैलेंद्र हैं-
    (क) दृढ़निश्चयी, सफल फ़िल्म निर्माता व कवि
    (ख) सफल फ़िल्म निर्माता, गीतकार व कवि
    (ग) समाज-सुधारक, कर्मयोगी गीतकार व कवि
    (घ) आदर्शवादी, उच्चकोटि के गीतकार व कवि

  3. निम्नलिखित कथन (A) तथा कारण (R) को ध्यानपूर्वक पढ़िए। उसके बाद दिए गए विकल्पों में से कोई एक सही विकल्प चुनकर लिखिए।
    कथन (A) - उनके गीत भाव-प्रवण थे- दुरूह नहीं।
    कारण (R) - शैलेंद्र के द्वारा लिखे गीत भावनाओं से ओत-प्रोत थे, उनमें गहराई थी। गीतों की भाषा सहज, सरल थी, क्लिष्ट नहीं थी।

    (क) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों गलत है।
    (ख) कथन (A) गलत है लेकिन कारण (R) सही है।
    (ग) कथन (A) सही है लेकिन कारण (R) उसकी गलत व्याख्या करता है।
    (घ) कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R) कथन (A) की सही व्याख्या करता है।

  4. 'मेरा जूता है जापानी...... 'यह गीत शैलेंद्र ही लिख सकते थे। लेखक द्वारा ऐसा कहा जाना दर्शाता है, शैलेंद्र के प्रति उनका -
    (क) कर्तव्यबोध
    (ख) मैत्रीभाव
    (ग) व्यक्तित्व
    (घ) अवलोकन

  5. गद्यांश के आधार पर शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप मिलती है कि वे थे -
    (क) बेहद गंभीर, उदार, दृढ इच्छाशक्ति और संकीर्णहदय
    (ख) बेहद गंभीर, उदार, कृपण और संकीर्णहृदय
    (ग) बेहद गंभीर, आवुक, कृपण और दृढ इच्छाशक्ति
    (घ) बेहद गंभीर, उदार, दृढ इच्छाशक्ति और भावुक

उत्कृष्ट होते हए भी 'तीसरी कसम' फ़िल्म सिनेमाघरों में क्यो नहीं चली?


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