मराठी

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए - 'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया। स्पष्ट कीजिए।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया। स्पष्ट कीजिए।

टीपा लिहा
Advertisements

उत्तर

राजकपूर अभिनय में प्रवीण थे। वे पात्र को अपने ऊपर हावी नही होने देते थे बल्कि उसको जीवंत कर देते थे। 'तीसरी कसम' में भी हीरामन पर राजकपूर हावी नही था बल्कि राजकपूर ने हीरामन को आत्मा दे दी थी। उसका उकड़ू बैठना, नौटंकी की बाई में अपनापन खोजना, गीतगाता गाडीवान, सरल देहाती मासूमियत को चरम सीमा तक ले जाते हैं। इस तरह उनका महिमामय व्यक्तित्व हीरामन की आत्मा में उतर गया।

shaalaa.com
तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.4: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र - लिखित (ख) [पृष्ठ ९५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 2 Class 10
पाठ 2.4 तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र
लिखित (ख) | Q 2 | पृष्ठ ९५

संबंधित प्रश्‍न

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

शैलेंद्र ने कितनी फ़िल्में बनाईं?


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-

फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को किस तरह का कलाकार मानते थे?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए 

'तीसरी कसम' फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों मेंलिखिए 

शैलेन्द्र के अनुसार कलाकार का कर्तव्य क्या है?


निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों मेंलिखिए -

राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह करने पर भी शैलेन्द्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

..... वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

उनका यह दृढ़ मतंव्य था कि दर्शकों की रूचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्त्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रूचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।


निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -

उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरूह नहीं।


समाचार पत्रों में फ़िल्मों की समीक्षा दी जाती है। किन्हीं तीन फ़िल्मों की समीक्षा पढ़िए और तीसरी कसम’ फ़िल्म को देखकर इस फ़िल्म की समीक्षा स्वयं लिखने का प्रयास कीजिए।


फ़िल्मों के संदर्भ में आपने अकसर यह सुना होगा-‘जो बात पहले की फ़िल्मों में थी, वह अब कहाँ’। वतर्ममान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में क्या समानता और अंतर है? कक्षा में चर्चा कीजिए।


लोकगीत हमें अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। तीसरी कसम’ फ़िल्म में लोकगीतों का प्रयोग किया गया है। आप भी अपने क्षेत्र के प्रचलित दो-तीन लोकगीतों को एकत्र कर परियोजना कॉपी पर लिखिए।


‘तीसरी कसम’ जैसी और भी फ़िल्में हैं, जो किसी न किसी भाषा की साहित्यिक रचना पर बनी हैं। ऐसी फ़िल्मों की सूची निम्नांकित प्रपत्र के आधार पर तैयार करें।

क्र. सं फिल्म का नाम साहित्यिक रचना भाषा रचनाकार
1. देवदास देवदास बंगला शरतचंद्र
2. ______ ______ ______ ______
3. ______ ______ ______ ______

संगम की सफलता से उत्साहित राजकपूर ने कन-सा कदम उठाया?


राजकपूर ने शैलेंद्र के साथ किस तरह यारउन्ना मस्ती की?


‘तीसरी कसम’ जैसी फ़िल्म बनाने के पीछे शैलेंद्र की मंशा क्या थी?


‘रातें दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी नयाँ’ इस पंक्ति के रेखांकित अंश पर किसे आपत्ति थी और क्यों?


‘राजकपूर जिन्हें समीक्षक और कलामर्मज्ञ आँखों से बात करने वाला मानते हैं’ के आधार पर राजकपूर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×