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Question
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?
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Solution
शोमैन का अर्थ है- ऐसा व्यक्ति जो अपनी कला के प्रदर्शन से ज़्यादा से ज़्यादा जन समुदाय इकट्ठा कर सके। वह दर्शकों को अंत तक बाँधे रखता है तभी वह सफल होता है। राजकपूर भी महान कलाकार थे। जिस पात्र की भूमिका निभाते थे उसी में समा जाते थे। इसलिए उनका अभिनय सजीव लगता था। उन्होंने कला को ऊँचाइयों तक पहुँचाया था।
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए-
राजकपूर की किस बात पर शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
'तीसरी कसम' फ़िल्म को सेल्यूलाइड पर लिखी कविता क्यों कहा गया है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
शैलेन्द्र के अनुसार कलाकार का कर्तव्य क्या है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
फ़िल्म 'श्री 420' के गीत 'रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति क्यों की?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि तीसरी कसम ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है?
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
लेखक के इस कथन से कि 'तीसरी कसम' फ़िल्म कोई सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था, आप कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
..... वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
उनका यह दृढ़ मतंव्य था कि दर्शकों की रूचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्त्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रूचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।
निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए -
व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।
फणीश्वरनाथ रेणु की किस कहानी पर ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म आधारित है, जानकारी प्राप्त कीजिए और मूल रचना पढ़िए।
फ़िल्मों के संदर्भ में आपने अकसर यह सुना होगा-‘जो बात पहले की फ़िल्मों में थी, वह अब कहाँ’। वतर्ममान दौर की फ़िल्मों और पहले की फ़िल्मों में क्या समानता और अंतर है? कक्षा में चर्चा कीजिए।
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राजकपूर ने शैलेंद्र के साथ अपनी मित्रता? निर्वाह कैसे किया?
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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर लिखिए:
| राज कपूर ने एक अच्छे और सच्चे मित्र की हैसियत से शैलेंद्र को फ़िल्म की असफ़लता के खतरों से आगाह भी किया। पर वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी, जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी। 'तीसरी कसम' कितनी ही महान् फ़िल्म क्यों न रही हो, लेकिनक यह एक दुःखद सत्य है कि इसे प्रदर्शित करने के लिए बमुश्किल वितरक मिले। बावजूद इसके कि “तीसरी कसम' में राज कपूर और वहीदा रहमान जैसे नामजद सितारे थे, शंकर-जयकिशन का संगीत था, जिनकी लोकप्रियता उन दिनों सातवें आसमान पर थी और इसके गीत भी फ़िल्म के प्रदर्शन के पूर्व ही बेहद लोकप्रिय हो चुके थे, लेकिन इस फ़िल्म को खरीदने वाला कोई नहीं था। दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने का गणित जानने वाले की समझ से परे थी। उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज नहीं थी। |
- राज कपूर ने शैलेंद्र को किस बात से आगाह किया था?
(a) फ़िल्म का किसी को समझ न आने वाली बात से।
(b) फ़िल्म से कोई आर्थिक लाभ न मिलने वाली बात से।
(c) फ़िल्म निर्माण में होने वाली परेशानियों से।
(d) फ़िल्म की संभावित असफ़लता के खतरों से। - शैलेंद्र को किस प्रकार का व्यक्ति माना जा सकता है?
(a) कुशल फ़िल्म निर्माता
(b) प्रसिद्ध गीतकार
(c) आदर्शवादी भावुक कवि
(d) आत्म-संतुष्ट व्यक्ति - 'तीसरी कसम' फिल्म का दुःखद सत्य क्या था?
(a) फ़िल्म के लिए खरीददार का न मिलना।
(b) लोगों का फ़िल्म को न समझ पाना।
(c) फ़िल्म का रूपहले पर्दे पर न पहुँच पाना।
(d) फ़िल्म को प्रसिद्धि न मिल पाना। - गंद्यांश में आई पंक्ति - 'दो से चार बनाने का गणित' - का अर्थ है:
(a) अधिक-से-अधिक धन कमाना।
(b) संख्याओं को जोड़ने का हिसाब।
(c) अधिक-से-अधिक मुनाफ़ा कमाना।
(d) संख्याओं को गुणा करने का हिसाब। - “उसमें रची-बसी करुणा तराजू पर तौली जा सकने वाली चीज़ नहीं थी।” पंक्ति का आशय है -
(a) यह करुणा अनुभूति का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(b) यह करुणा बुद्धि का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(c) यह करुणा हृदय का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
(d) यह करुणा भावना का विषय थी, नाप-तोल का नहीं।
