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Question
महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?
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Solution
महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्यों में स्पष्ट अंतर दिखाई देता था। सूर्योदय के समय चारों ओर चीख-पुकार, करुण क्रंदन और हाहाकार के बीच भी लोगों के चेहरों पर हल्की सी आशा झलकती थी। लोग एक-दूसरे को ढाढ़स बँधाते रहते थे।
लेकिन सूर्यास्त होते ही पूरा वातावरण बदल जाता था। लोग भय के कारण अपने-अपने घरों में सिमट जाते थे और पूरी तरह शांत हो जाते थे। उस समय माताएँ अपने मरते हुए पुत्र को ‘बेटा’ कहने की हिम्मत भी नहीं कर पाती थीं। ऐसे कठिन समय में केवल पहलवान की ढोलक की आवाज गूँजती थी, जो मानो महामारी को चुनौती दे रही हो। उसकी ध्वनि इन कमजोर और भूखे गाँववालों के लिए संजीवनी का काम करती थी और उनके निष्प्राण शरीरों में नई ऊर्जा और शक्ति का संचार कर देती थी।
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गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?
ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था?
कुश्ती या दंगल पहले लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था। पहलवानों को राजा एवं लोगों के द्वारा विशेष सम्मान दिया जाता था-
(क) ऐसी स्थिति अब क्यों नहीं है?
(ख) इसकी जगह अब किन खेलों ने ले ली है?
(ग) कुश्ती को फिर से प्रिय खेल बनाने के लिए क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं?
आशय स्पष्ट करें-
आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।
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