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कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए?

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Question

कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए?

Very Long Answer
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Solution

कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जिनसे लुट्टन के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. नौ वर्ष की छोटी उम्र में ही लुट्टन के माता-पिता का निधन हो गया था। उसकी शादी भी बचपन में हो चुकी थी, इसलिए उसका पालन-पोषण उसकी विधवा सास ने किया। सास पर हो रहे अन्याय को देखकर उसने बदला लेने के लिए पहलवानी अपनाई।
  2. किशोरावस्था में श्यामनगर के मेले में उसने चाँद सिंह नामक पहलवान को पराजित किया, जिससे उसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई। नियमित अभ्यास और मेहनत के बल पर उसने ‘काला खाँ’ जैसे नामी पहलवानों को भी हराकर अपराजेय पहचान बनाई।
  3. वह लगभग पंद्रह वर्षों तक राजदरबार में रहा और उसने अपने दोनों पुत्रों को भी कुश्ती की शिक्षा दी। राजा की मृत्यु के बाद नए शासक ने उसे दरबार से हटा दिया, जिसके बाद वह अपने गाँव लौट आया।
  4. गाँव लौटकर उसने गाँव के बाहर अपना अखाड़ा स्थापित किया और वहाँ के युवकों को कुश्ती सिखाने लगा।
  5. बाद में गाँव में महामारी फैल गई, जिससे सूखा और बीमारी का संकट गहरा गया। अनेक लोग हैजा और मलेरिया से प्रभावित हुए। इसी महामारी में उसके दोनों पुत्रों की मृत्यु हो गई और अंततः एक रात लुट्टन सिंह का भी निधन हो गया।
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पहलवान की ढोलक
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Chapter 13: फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक) - अभ्यास [Page 108]

APPEARS IN

NCERT Hindi Aaroh Bhag 2 Class 12
Chapter 13 फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक)
अभ्यास | Q 2. | Page 108

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कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द और ढोल की आवाज़ में आपके मन में कैसी ध्वनि पैदा करते हैं, उन्हें शब्द दीजिए।

लुट्टन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है?

गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?


ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था?


महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?


कुश्ती या दंगल पहले लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था। पहलवानों को राजा एवं लोगों के द्वारा विशेष सम्मान दिया जाता था-

(क) ऐसी स्थिति अब क्यों नहीं है?

(ख) इसकी जगह अब किन खेलों ने ले ली है?

(ग) कुश्ती को फिर से प्रिय खेल बनाने के लिए क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं?


आशय स्पष्ट करें-

आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।


पाठ में अनेक स्थलों पर प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। पाठ में से ऐसे अंश चुनिए और उनका आशय स्पष्ट कीजिए।

पाठ में मलेरिया और हैज़े से पीड़ित गाँव की दयनीय स्थिति को चित्रित किया गया है। आप ऐसी किसी अन्य आपद स्थिति की कल्पना करें और लिखें कि आप ऐसी स्थिति का सामना कैसे करेंगी/करेंगे?

ढोलक की थाप मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी- कला से जीवन के संबंध को ध्यान में रखते हुए चर्चा कीजिए।

चर्चा करें- कलाओं का अस्तित्व व्यवस्था का मोहताज नहीं है।


हर विषय, क्षेत्र, परिवेश आदि के कुछ विशिष्ट शब्द होते हैं। पाठ में कुश्ती से जुड़ी शब्दावली का बहुतायत प्रयोग हुआ है। उन शब्दों की सूची बनाइए। साथ ही नीचे दिए गए क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले कोई पाँच-पाँच शब्द बताइए-
  • चिकित्सा
  • क्रिकेट
  • न्यायालय
  • या अपनी पसंद का कोई क्षेत्र

पाठ में अनेक अंश ऐसे हैं जो भाषा के विशिष्ट प्रयोगों की बानगी प्रस्तुत करते हैं। भाषा का विशिष्ट प्रयोग न केवल भाषाई सर्जनात्मकता को बढ़ावा देता है बल्कि कथ्य को भी प्रभावी बनाता है। यदि उन शब्दों, वाक्यांशों के स्थान पर किन्हीं अन्य का प्रयोग किया जाए तो संभवतः वह अर्थगत चमत्कार और भाषिक सौंदर्य उद्घाटित न हो सके। कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं-
  • फिर बाज़ की तरह उस पर टूट पड़ा।
  • राजा साहब की स्नेह-दृष्टि ने उसकी प्रसिद्धि में चार चाँद लगा दिए।
  • पहलवान की स्त्री भी दो पहलवानों को पैदा करके स्वर्ग सिधार गई थी।

इन विशिष्ट भाषा-प्रयोगों का प्रयोग करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए।


जैसे क्रिकेट की कमेंट्री की जाती है वैसे ही इसमें कुश्ती की कमेंट्री की गई है? आपको दोनों में क्या समानता दिखाई पड़ती है?


‘ढोल में तो जैसे पहलवान की जान बसी थी।’ ‘पहलवान की ढोलक पाठ के आधार पर तर्क सहित पंक्ति को सिद्ध कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

कहानी 'पहलवान की ढोलक' व्यवस्था के बदलने के साथ लोक कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कहानी है। पंक्ति को विस्तार दीजिए।


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