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Question
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Solution
कुश्ती के दौरान ढोल की ध्वनि और लुट्टन के दाँव-पेंचों में गुरु-शिष्य जैसा गहरा तालमेल दिखाई देता था। ढोलक की हर थाप से लुट्टन को कुछ नया सीखने और समझने का अवसर मिलता था। ढोल की आवाज़ से मन में उत्साह भर जाता है और शरीर में नई ऊर्जा और जोश का संचार हो जाता है।
चट्ट धा, गिर धा .......... आ जा भीड़ जा
चटाक्क चट्ट धा .......... उठाकर पटक दे
ढाक्क ढिना .......... वाह पट्ठे
चट्ट गिड धा .......... मत डरना
धिक धिना .......... चित करो
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कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए?
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कुश्ती या दंगल पहले लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था। पहलवानों को राजा एवं लोगों के द्वारा विशेष सम्मान दिया जाता था-
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आशय स्पष्ट करें-
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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
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