Advertisements
Advertisements
Question
कुश्ती या दंगल पहले लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था। पहलवानों को राजा एवं लोगों के द्वारा विशेष सम्मान दिया जाता था-
(क) ऐसी स्थिति अब क्यों नहीं है?
(ख) इसकी जगह अब किन खेलों ने ले ली है?
(ग) कुश्ती को फिर से प्रिय खेल बनाने के लिए क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं?
Advertisements
Solution
(क) कुश्ती, दंगल और पहलवानी पहले राजाओं के पसंदीदा मनोरंजन और शौक हुआ करते थे। लेकिन अब राजतंत्र की जगह लोकतंत्र स्थापित हो चुका है और मनोरंजन के अनेक नए साधन उपलब्ध हो गए हैं, इसलिए अब ऐसी स्थिति नहीं रही।
(ख) आज कुश्ती और दंगल जैसे खेलों की जगह बॉक्सिंग, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, फुटबॉल, टेबल टेनिस और शतरंज जैसे खेल अधिक लोकप्रिय हो गए हैं।
(ग) कुश्ती को दोबारा लोकप्रिय बनाने के लिए ग्रामीण स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा सकता है। साथ ही सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएँ शुरू की जा सकती हैं, जिससे बच्चों में इस खेल के प्रति रुचि बढ़ सके।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए?
गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?
ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था?
महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?
आशय स्पष्ट करें-
आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।
चर्चा करें- कलाओं का अस्तित्व व्यवस्था का मोहताज नहीं है।
- चिकित्सा
- क्रिकेट
- न्यायालय
- या अपनी पसंद का कोई क्षेत्र
- फिर बाज़ की तरह उस पर टूट पड़ा।
- राजा साहब की स्नेह-दृष्टि ने उसकी प्रसिद्धि में चार चाँद लगा दिए।
- पहलवान की स्त्री भी दो पहलवानों को पैदा करके स्वर्ग सिधार गई थी।
इन विशिष्ट भाषा-प्रयोगों का प्रयोग करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए।
जैसे क्रिकेट की कमेंट्री की जाती है वैसे ही इसमें कुश्ती की कमेंट्री की गई है? आपको दोनों में क्या समानता दिखाई पड़ती है?
‘ढोल में तो जैसे पहलवान की जान बसी थी।’ ‘पहलवान की ढोलक पाठ के आधार पर तर्क सहित पंक्ति को सिद्ध कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
कहानी 'पहलवान की ढोलक' व्यवस्था के बदलने के साथ लोक कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कहानी है। पंक्ति को विस्तार दीजिए।
