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गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?

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Question

गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?

Long Answer
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Solution

गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों की मृत्यु हो जाने के बाद भी लुट्टन पहलवान रात की उस भयावह स्थिति को दूर करने तथा लोगों में जीने की इच्छा जगाने के लिए ढोल बजाता था। जब उसके दोनों बेटे महामारी की चपेट में आ गए, तो वे असहनीय पीड़ा से कराहते हुए उससे कहने लगे कि ‘बाबा! उठा-पटक वाला दो ताल यानी चटाक-चट धा ताल बजाओ।’ लुट्टन पूरी रात वही ताल बजाता रहा। सुबह होने पर उसके दोनों बेटों की मृत्यु हो गई। इसलिए अपने बेटों की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उनके देहांत के बाद भी लुट्टन पहलवान ढोल बजाता रहा।

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पहलवान की ढोलक
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Chapter 13: फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक) - अभ्यास [Page 108]

APPEARS IN

NCERT Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
Chapter 13 फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक)
अभ्यास | Q 4. | Page 108

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कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द और ढोल की आवाज़ में आपके मन में कैसी ध्वनि पैदा करते हैं, उन्हें शब्द दीजिए।

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आशय स्पष्ट करें-

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पाठ में मलेरिया और हैज़े से पीड़ित गाँव की दयनीय स्थिति को चित्रित किया गया है। आप ऐसी किसी अन्य आपद स्थिति की कल्पना करें और लिखें कि आप ऐसी स्थिति का सामना कैसे करेंगी/करेंगे?

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चर्चा करें- कलाओं का अस्तित्व व्यवस्था का मोहताज नहीं है।


हर विषय, क्षेत्र, परिवेश आदि के कुछ विशिष्ट शब्द होते हैं। पाठ में कुश्ती से जुड़ी शब्दावली का बहुतायत प्रयोग हुआ है। उन शब्दों की सूची बनाइए। साथ ही नीचे दिए गए क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले कोई पाँच-पाँच शब्द बताइए-
  • चिकित्सा
  • क्रिकेट
  • न्यायालय
  • या अपनी पसंद का कोई क्षेत्र

पाठ में अनेक अंश ऐसे हैं जो भाषा के विशिष्ट प्रयोगों की बानगी प्रस्तुत करते हैं। भाषा का विशिष्ट प्रयोग न केवल भाषाई सर्जनात्मकता को बढ़ावा देता है बल्कि कथ्य को भी प्रभावी बनाता है। यदि उन शब्दों, वाक्यांशों के स्थान पर किन्हीं अन्य का प्रयोग किया जाए तो संभवतः वह अर्थगत चमत्कार और भाषिक सौंदर्य उद्घाटित न हो सके। कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं-
  • फिर बाज़ की तरह उस पर टूट पड़ा।
  • राजा साहब की स्नेह-दृष्टि ने उसकी प्रसिद्धि में चार चाँद लगा दिए।
  • पहलवान की स्त्री भी दो पहलवानों को पैदा करके स्वर्ग सिधार गई थी।

इन विशिष्ट भाषा-प्रयोगों का प्रयोग करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए।


जैसे क्रिकेट की कमेंट्री की जाती है वैसे ही इसमें कुश्ती की कमेंट्री की गई है? आपको दोनों में क्या समानता दिखाई पड़ती है?


‘ढोल में तो जैसे पहलवान की जान बसी थी।’ ‘पहलवान की ढोलक पाठ के आधार पर तर्क सहित पंक्ति को सिद्ध कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

कहानी 'पहलवान की ढोलक' व्यवस्था के बदलने के साथ लोक कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कहानी है। पंक्ति को विस्तार दीजिए।


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