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प्रश्न
गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?
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उत्तर
गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों की मृत्यु हो जाने के बाद भी लुट्टन पहलवान रात की उस भयावह स्थिति को दूर करने तथा लोगों में जीने की इच्छा जगाने के लिए ढोल बजाता था। जब उसके दोनों बेटे महामारी की चपेट में आ गए, तो वे असहनीय पीड़ा से कराहते हुए उससे कहने लगे कि ‘बाबा! उठा-पटक वाला दो ताल यानी चटाक-चट धा ताल बजाओ।’ लुट्टन पूरी रात वही ताल बजाता रहा। सुबह होने पर उसके दोनों बेटों की मृत्यु हो गई। इसलिए अपने बेटों की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए उनके देहांत के बाद भी लुट्टन पहलवान ढोल बजाता रहा।
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