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आशय स्पष्ट करें- आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर

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प्रश्न

आशय स्पष्ट करें-

आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।

स्पष्ट कीजिए
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उत्तर

प्रस्तुत गद्यांश का आशय यह है कि मलेरिया और हैजे के प्रकोप के कारण पूरा वातावरण अत्यंत पीड़ित और भयभीत था। चारों ओर घना अँधेरा और गहरा सन्नाटा फैला हुआ था। ऐसी स्थिति में यदि कोई संवेदनशील तारा आकाश से टूटकर अपनी रोशनी पृथ्वी तक पहुँचाना भी चाहे, तो उसकी चमक और ऊर्जा रास्ते में ही समाप्त हो जाती। लेखक का तात्पर्य यह है कि स्थिर तारे प्रकाशमान बने रहते हैं, जबकि टूटे हुए तारे का अस्तित्व समाप्त हो जाता है।

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पहलवान की ढोलक
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अध्याय 13: फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक) - अभ्यास [पृष्ठ १०८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 13 फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक)
अभ्यास | Q 8. | पृष्ठ १०८

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