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प्रश्न
कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए?
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उत्तर
कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं, जिनसे लुट्टन के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देते हैं, जो इस प्रकार हैं-
- नौ वर्ष की छोटी उम्र में ही लुट्टन के माता-पिता का निधन हो गया था। उसकी शादी भी बचपन में हो चुकी थी, इसलिए उसका पालन-पोषण उसकी विधवा सास ने किया। सास पर हो रहे अन्याय को देखकर उसने बदला लेने के लिए पहलवानी अपनाई।
- किशोरावस्था में श्यामनगर के मेले में उसने चाँद सिंह नामक पहलवान को पराजित किया, जिससे उसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई। नियमित अभ्यास और मेहनत के बल पर उसने ‘काला खाँ’ जैसे नामी पहलवानों को भी हराकर अपराजेय पहचान बनाई।
- वह लगभग पंद्रह वर्षों तक राजदरबार में रहा और उसने अपने दोनों पुत्रों को भी कुश्ती की शिक्षा दी। राजा की मृत्यु के बाद नए शासक ने उसे दरबार से हटा दिया, जिसके बाद वह अपने गाँव लौट आया।
- गाँव लौटकर उसने गाँव के बाहर अपना अखाड़ा स्थापित किया और वहाँ के युवकों को कुश्ती सिखाने लगा।
- बाद में गाँव में महामारी फैल गई, जिससे सूखा और बीमारी का संकट गहरा गया। अनेक लोग हैजा और मलेरिया से प्रभावित हुए। इसी महामारी में उसके दोनों पुत्रों की मृत्यु हो गई और अंततः एक रात लुट्टन सिंह का भी निधन हो गया।
संबंधित प्रश्न
गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?
ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था?
महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?
कुश्ती या दंगल पहले लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था। पहलवानों को राजा एवं लोगों के द्वारा विशेष सम्मान दिया जाता था-
(क) ऐसी स्थिति अब क्यों नहीं है?
(ख) इसकी जगह अब किन खेलों ने ले ली है?
(ग) कुश्ती को फिर से प्रिय खेल बनाने के लिए क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं?
आशय स्पष्ट करें-
आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।
चर्चा करें- कलाओं का अस्तित्व व्यवस्था का मोहताज नहीं है।
- चिकित्सा
- क्रिकेट
- न्यायालय
- या अपनी पसंद का कोई क्षेत्र
- फिर बाज़ की तरह उस पर टूट पड़ा।
- राजा साहब की स्नेह-दृष्टि ने उसकी प्रसिद्धि में चार चाँद लगा दिए।
- पहलवान की स्त्री भी दो पहलवानों को पैदा करके स्वर्ग सिधार गई थी।
इन विशिष्ट भाषा-प्रयोगों का प्रयोग करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए।
जैसे क्रिकेट की कमेंट्री की जाती है वैसे ही इसमें कुश्ती की कमेंट्री की गई है? आपको दोनों में क्या समानता दिखाई पड़ती है?
‘ढोल में तो जैसे पहलवान की जान बसी थी।’ ‘पहलवान की ढोलक पाठ के आधार पर तर्क सहित पंक्ति को सिद्ध कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
कहानी 'पहलवान की ढोलक' व्यवस्था के बदलने के साथ लोक कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कहानी है। पंक्ति को विस्तार दीजिए।
