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प्रश्न
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उत्तर
‘उसका गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है’ लुट्टन पहलवान ने यह इसलिए कहा होगा क्योंकि उसने किसी पहलवान से कुश्ती के दाँव-पेंच नहीं सीखे थे और न ही उसका उद्देश्य पहलवान बनना था। बचपन में वह गाय चराते समय गायों के दूध का खूब सेवन करता था, जिससे उसका शरीर मजबूत और हृष्ट-पुष्ट बन गया था। वह लोगों से बदला लेने की भावना से व्यायाम करता था। जब वह श्यामनगर के मेले में गया, तो वहाँ दंगल में ढोल बज रहा था और पहलवान कुश्ती लड़ रहे थे। अचानक वह स्वयं ही अखाड़े में कूद पड़ा और ढोल की ध्वनि से प्रेरित होकर उसने प्रसिद्ध चाँद सिंह पहलवान को पराजित कर दिया।
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आशय स्पष्ट करें-
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निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-
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