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लुट्टन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है?

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प्रश्न

लुट्टन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है?
दीर्घउत्तर
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उत्तर

‘उसका गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है’ लुट्टन पहलवान ने यह इसलिए कहा होगा क्योंकि उसने किसी पहलवान से कुश्ती के दाँव-पेंच नहीं सीखे थे और न ही उसका उद्देश्य पहलवान बनना था। बचपन में वह गाय चराते समय गायों के दूध का खूब सेवन करता था, जिससे उसका शरीर मजबूत और हृष्ट-पुष्ट बन गया था। वह लोगों से बदला लेने की भावना से व्यायाम करता था। जब वह श्यामनगर के मेले में गया, तो वहाँ दंगल में ढोल बज रहा था और पहलवान कुश्ती लड़ रहे थे। अचानक वह स्वयं ही अखाड़े में कूद पड़ा और ढोल की ध्वनि से प्रेरित होकर उसने प्रसिद्ध चाँद सिंह पहलवान को पराजित कर दिया।

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पहलवान की ढोलक
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पाठ 13: फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक) - अभ्यास [पृष्ठ १०८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
पाठ 13 फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक)
अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ १०८

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