मराठी

ढोलक की थाप मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी- कला से जीवन के संबंध को ध्यान में रखते हुए चर्चा कीजिए।

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

ढोलक की थाप मृत-गाँव में संजीवनी शक्ति भरती रहती थी- कला से जीवन के संबंध को ध्यान में रखते हुए चर्चा कीजिए।
सविस्तर उत्तर
Advertisements

उत्तर

कला व्यक्ति के मन से स्वार्थ, परिवार, धर्म, भाषा और जाति जैसी सीमाओं को समाप्त कर उसे व्यापक और विस्तृत दृष्टिकोण प्रदान करती है। यह मनुष्य को महानता की ओर ले जाती है। कला में मानव मन में भावनाएँ जगाने, उसकी प्रवृत्तियों को रूपांतरित करने, विचारधारा को बदलने और रुचियों को सही दिशा देने की अद्भुत शक्ति होती है। इसके अध्ययन से आत्मसंतोष और आनंद की अनुभूति प्राप्त होती है तथा इसके सकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति का व्यक्तित्व विकसित होता है। जब यही कला संगीत के रूप में अभिव्यक्त होती है, तो कलाकार अपने गायन और वादन से न केवल स्वयं को बल्कि श्रोताओं को भी मंत्रमुग्ध कर देता है, जिससे वे आत्मविस्मृति की स्थिति में पहुँच जाते हैं। दीपक राग से दीपक का जल उठना और मल्हार राग से वर्षा का होना कला-साधना की सर्वोच्च सिद्धि को दर्शाता है।

shaalaa.com
पहलवान की ढोलक
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 13: फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक) - अभ्यास [पृष्ठ १०८]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 Class 12
पाठ 13 फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक)
अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ १०८

संबंधित प्रश्‍न

कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द और ढोल की आवाज़ में आपके मन में कैसी ध्वनि पैदा करते हैं, उन्हें शब्द दीजिए।

कहानी के किस-किस मोड़ पर लुट्टन के जीवन में क्या-क्या परिवर्तन आए?


लुट्टन पहलवान ने ऐसा क्यों कहा होगा कि मेरा गुरु कोई पहलवान नहीं, यही ढोल है?

गाँव में महामारी फैलने और अपने बेटों के देहांत के बावजूद लुट्टन पहलवान ढोल क्यों बजाता रहा?


ढोलक की आवाज़ का पूरे गाँव पर क्या असर होता था?


महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?


कुश्ती या दंगल पहले लोगों और राजाओं का प्रिय शौक हुआ करता था। पहलवानों को राजा एवं लोगों के द्वारा विशेष सम्मान दिया जाता था-

(क) ऐसी स्थिति अब क्यों नहीं है?

(ख) इसकी जगह अब किन खेलों ने ले ली है?

(ग) कुश्ती को फिर से प्रिय खेल बनाने के लिए क्या-क्या कार्य किए जा सकते हैं?


आशय स्पष्ट करें-

आकाश से टूटकर यदि कोई भावुक तारा पृथ्वी पर जाना भी चाहता तो उसकी ज्योति और शक्ति रास्ते में ही शेष हो जाती थी। अन्य तारे उसकी भावुकता अथवा असफलता पर खिलखिलाकर हँस पड़ते थे।


पाठ में अनेक स्थलों पर प्रकृति का मानवीकरण किया गया है। पाठ में से ऐसे अंश चुनिए और उनका आशय स्पष्ट कीजिए।

पाठ में मलेरिया और हैज़े से पीड़ित गाँव की दयनीय स्थिति को चित्रित किया गया है। आप ऐसी किसी अन्य आपद स्थिति की कल्पना करें और लिखें कि आप ऐसी स्थिति का सामना कैसे करेंगी/करेंगे?

चर्चा करें- कलाओं का अस्तित्व व्यवस्था का मोहताज नहीं है।


हर विषय, क्षेत्र, परिवेश आदि के कुछ विशिष्ट शब्द होते हैं। पाठ में कुश्ती से जुड़ी शब्दावली का बहुतायत प्रयोग हुआ है। उन शब्दों की सूची बनाइए। साथ ही नीचे दिए गए क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले कोई पाँच-पाँच शब्द बताइए-
  • चिकित्सा
  • क्रिकेट
  • न्यायालय
  • या अपनी पसंद का कोई क्षेत्र

पाठ में अनेक अंश ऐसे हैं जो भाषा के विशिष्ट प्रयोगों की बानगी प्रस्तुत करते हैं। भाषा का विशिष्ट प्रयोग न केवल भाषाई सर्जनात्मकता को बढ़ावा देता है बल्कि कथ्य को भी प्रभावी बनाता है। यदि उन शब्दों, वाक्यांशों के स्थान पर किन्हीं अन्य का प्रयोग किया जाए तो संभवतः वह अर्थगत चमत्कार और भाषिक सौंदर्य उद्घाटित न हो सके। कुछ प्रयोग इस प्रकार हैं-
  • फिर बाज़ की तरह उस पर टूट पड़ा।
  • राजा साहब की स्नेह-दृष्टि ने उसकी प्रसिद्धि में चार चाँद लगा दिए।
  • पहलवान की स्त्री भी दो पहलवानों को पैदा करके स्वर्ग सिधार गई थी।

इन विशिष्ट भाषा-प्रयोगों का प्रयोग करते हुए एक अनुच्छेद लिखिए।


जैसे क्रिकेट की कमेंट्री की जाती है वैसे ही इसमें कुश्ती की कमेंट्री की गई है? आपको दोनों में क्या समानता दिखाई पड़ती है?


‘ढोल में तो जैसे पहलवान की जान बसी थी।’ ‘पहलवान की ढोलक पाठ के आधार पर तर्क सहित पंक्ति को सिद्ध कीजिए।


निम्नलिखित प्रश्न को ध्यानपूर्वक पढ़कर प्रश्न के लगभग 40 शब्दों में उत्तर दीजिए :-

कहानी 'पहलवान की ढोलक' व्यवस्था के बदलने के साथ लोक कला और इसके कलाकार के अप्रासंगिक हो जाने की कहानी है। पंक्ति को विस्तार दीजिए।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×