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प्रश्न
महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्य में क्या अंतर होता था?
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उत्तर
महामारी फैलने के बाद गाँव में सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्यों में स्पष्ट अंतर दिखाई देता था। सूर्योदय के समय चारों ओर चीख-पुकार, करुण क्रंदन और हाहाकार के बीच भी लोगों के चेहरों पर हल्की सी आशा झलकती थी। लोग एक-दूसरे को ढाढ़स बँधाते रहते थे।
लेकिन सूर्यास्त होते ही पूरा वातावरण बदल जाता था। लोग भय के कारण अपने-अपने घरों में सिमट जाते थे और पूरी तरह शांत हो जाते थे। उस समय माताएँ अपने मरते हुए पुत्र को ‘बेटा’ कहने की हिम्मत भी नहीं कर पाती थीं। ऐसे कठिन समय में केवल पहलवान की ढोलक की आवाज गूँजती थी, जो मानो महामारी को चुनौती दे रही हो। उसकी ध्वनि इन कमजोर और भूखे गाँववालों के लिए संजीवनी का काम करती थी और उनके निष्प्राण शरीरों में नई ऊर्जा और शक्ति का संचार कर देती थी।
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