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कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द और ढोल की आवाज़ में आपके मन में कैसी ध्वनि पैदा करते हैं, उन्हें शब्द दीजिए।

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प्रश्न

कुश्ती के समय ढोल की आवाज़ और लुट्टन के दाँव-पेंच में क्या तालमेल था? पाठ में आए ध्वन्यात्मक शब्द और ढोल की आवाज़ में आपके मन में कैसी ध्वनि पैदा करते हैं, उन्हें शब्द दीजिए।
दीर्घउत्तर
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उत्तर

कुश्ती के दौरान ढोल की ध्वनि और लुट्टन के दाँव-पेंचों में गुरु-शिष्य जैसा गहरा तालमेल दिखाई देता था। ढोलक की हर थाप से लुट्टन को कुछ नया सीखने और समझने का अवसर मिलता था। ढोल की आवाज़ से मन में उत्साह भर जाता है और शरीर में नई ऊर्जा और जोश का संचार हो जाता है।

चट्ट धा, गिर धा .......... आ जा भीड़ जा 

चटाक्क चट्ट धा .......... उठाकर पटक दे 

ढाक्क ढिना .......... वाह पट्ठे 

चट्ट गिड धा .......... मत डरना 

धिक धिना .......... चित करो

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पहलवान की ढोलक
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अध्याय 13: फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक) - अभ्यास [पृष्ठ १०८]

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एनसीईआरटी Hindi Aaroh Bhag 2 [English] Class 12
अध्याय 13 फणीश्वर नाथ रेणु (पहलवान की ढोलक)
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ १०८

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