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Question
कवि देव ने चाँद का वर्णन परंपरा से हटकर किया है, स्पष्ट कीजिए।
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Solution
कवि देव ने चाँदनी रात में अपना पूर्ण सौंदर्य बिखेर रहे चाँद का वर्णन परंपरा से हटकर किया है। चाँद के परंपरागत वर्णन में कवि उसे अत्यंत सुंदर बताते हुए सुंदरी के मुख को चाँद के समान बताते हैं, जबकि कवि देव ने चाँद को राधा के मुँह का प्रतिबिंब बताया है जो स्वच्छ आकाश रूपी दर्पण में बना है। यहाँ परंपरागत उपमान चंद्रमा को उपमेय से हीन दर्शाया गया है।
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