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इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।

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Question

इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।

Short/Brief Note
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Solution

इस कविता का मूलभाव है कि जीवन संघर्षों से भरा रहता है। इसमें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हर पल, हर पग पर चुनौतियाँ मिलती हैं परन्तु इन्हें स्वीकार करना चाहिए, इनसे घबरा कर पीछे नहीं हटना चाहिए, ना ही मुड़ कर देखना या किसी का सहारा लेना चाहिए। संकटों का सामना स्वयं ही करना चाहिए। बिना थके, बिना रूके, बिना हार माने इस जीवन पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

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पद्य (Poetry) (Class 9 B)
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Chapter 12: हरिवंशराय बच्चन - अग्नि पथ - प्रश्न अभ्यास [Page 105]

APPEARS IN

NCERT Hindi Sparsh Bhag 1 [English] Class 9
Chapter 12 हरिवंशराय बच्चन - अग्नि पथ
प्रश्न अभ्यास | Q 2.2 | Page 105

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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए 
गाता शुक जब किरण बसंत
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2. पर्वत की चोटी पर स्थित मंदिर की अनुपम शोभा।
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4. पिता की वेदना और उसका पश्चाताप।
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निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट करते हुए उनका अर्थ-सौंदर्य बताइए 

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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता?


निम्नलिखित भाव को पाठ में किन पंक्ति द्वारा अभिव्यक्त किया गया है
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
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