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Question
संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए −
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जग को गीत सुनाता
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Solution
संदर्भ : प्रस्तुत पंद्याश 'रामधारी सिंह दिनकर' द्वारा रचित 'गीत-अगीत' से लिया गया है। इसमें कवि एक गुलाब के पौधे की व्यथा का वर्णन करता है
व्याख्या : इन पंक्तियों में कवि यह कहना चाहते हैं कि नदी के किनारे उगा गुलाब का पौधा उसके कल-कल बहने के स्वर को समझता है कि वह अपनी बात तटों से कह रही है। अगर उसे भी स्वर मिला होता तो वह भी पतझड़ की व्यथा को सुना पाता। उसके भाव गीत न होकर अगीत ही रह जाते हैं।
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कवि किस दृश्य को महान बता रहा है, और क्यों?
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गाता शुक जब किरण बसंत
छूती अंग पर्ण से छनकर
निम्नलिखित उदाहरण में 'वाक्य-विचलन'को समझने का प्रयास कीजिए। इसी आधार पर प्रचलित वाक्य-विन्यास लिखिए :
उदाहरण: तट पर एक गुलाब सोचता
एक गुलाब तट पर सोचता है।
देते स्वर यदि मुझे विधाता
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अशराफ़ और कमीने से ले शाह ता वज़ीर
ये आदमी ही करते हैं सब कारे दिलपज़ीर
नीचे लिखे शब्दों का उच्चारण कीजिए और समझिए कि किस प्रकार नुक्ते के कारण उनमें अर्थ परिवर्तन आ गया है।
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राज़ (रहस्य) |
फ़न (कौशल) |
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राज (शासन) |
फन (साँप का मुहँ) |
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ज़रा (थोड़ा) |
फ़लक (आकाश) |
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जरा (बुढ़ापा) |
फलक (लकड़ी का तख्ता) |
ज़ फ़ से युक्त दो-दो शब्दों को और लिखिए।
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नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै
