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Question
तत्कालीन समाज में व्याप्त स्पृश्य और अस्पृश्य भावना में आज आए परिवर्तनों पर एक चर्चा आयोजित कीजिए।
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Solution
- पहला छात्र – एक समय था, जबकि हमारे समाज में ऊँच-नीच और छुआछूत का बोलबाला था।
- दूसरा छात्र – यह बुराई आज कम हो गई है। परंतु पूरी तरह मिटी नहीं है।
- तीसरा छात्र – आज तो छुआछूत को अपराध घोषित कर दिया गया है।
- चौथा छात्र – अपराध घोषित होने से कुछ नहीं होता। समाज में समस्या ज्यों की त्यों है। कुछ जातियों को नीच मानकर बड़ी जातियों के लोग उनसे दूर रहते हैं।
- पाँचवा छात्र – आरक्षण के कारण यह समस्या और अधिक बढ़ गई है। छठा छात्र-मेरे विचार में आरक्षण के कारण यह समस्या कम होगी।
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उदाहण : कोय − कोई , जे - जो
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ज्यों |
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कछु |
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नहिं |
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कोय |
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धनि |
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आखर |
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जिय |
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थोरे |
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होय |
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माखन |
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तरवारि |
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सींचिबो |
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मूलहिं |
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पिअत |
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पिआसो |
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बिगरी |
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आवे |
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सहाय |
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ऊबरै |
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बिनु |
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बिथा |
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अठिलैहैं |
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परिजाय |
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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
दूसरे पद की 'जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
नीचे लिखी पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए :
जैसे चितवत चंद चकोरा
रैदास द्वारा रचित दूसरे पद ‘ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै’ को प्रतिपाद्य लिखिए।
