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Question
आज की परिस्थितियों में रहीम के दोहे कितने प्रासंगिक हैं? किन्हीं दो उदाहरणों के माध्यम से स्पष्ट कीजिए।
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Solution
उदाहरण 1:
“रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरे, मोती मानुष चून॥”
इस दोहे में ‘पानी’ का अर्थ है सम्मान, नम्रता और संवेदनशीलता। आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में जब लोग एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे रहते हैं, यह दोहा सिखाता है कि रिश्तों में विनम्रता और सम्मान बनाए रखना कितना ज़रूरी है। यदि सम्मान चला गया, तो संबंधों में भी जीवन नहीं बचता।
उदाहरण 2:
“बड़े बड़ाई ना करे, बड़े न बोले बोल।
रहिमन हीरा कब कहे, लाख टका मेरा मोल॥”
यह दोहा आज के समाज में आत्मप्रशंसा और दिखावे की प्रवृत्ति को आइना दिखाता है। रहीम सिखाते हैं कि सच्चे और महान लोग कभी अपनी प्रशंसा खुद नहीं करते। आज के समय में जब सोशल मीडिया पर हर कोई अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन करता है, यह दोहा सादगी और आत्मनियंत्रण की प्रेरणा देता है।
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