Advertisements
Advertisements
Question
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए −
तू न थमेगा कभी
तू न मुड़ेगा कभी
Advertisements
Solution
इसका आशय यह है कि मनुष्य को कष्टों से भरे मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए कभी पीछे नहीं मुड़ना चाहिए। इस मार्ग पर केवल अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। उसके जीवन में अकर्मण्यता का कोई स्थान नहीं होना चाहिए क्योंकि आगे बढ़ते रहना ही उसके जीवन का लक्ष्य है। वह संघर्षों से भी न घबराए। वह सुख त्यागकर अग्निपथ को चुनौती देता रहे।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर दीजिए:
“वसंत का गया पतझड़’ और ‘बैसाख का गया भादों को लौटा’ से क्या अभिप्राय है?
अग्नि पथ’ कविता थके-हारे निराश मन को उत्साह एवं प्रेरणा से भर देती है। स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए:
प्रथम छंद में वर्णित प्रकृति-चित्रण को लिखिए।
संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए −
गाता शुक जब किरण बसंत
छूती अंग पर्ण से छनकर
निम्नलिखित उदाहरण में 'वाक्य-विचलन'को समझने का प्रयास कीजिए। इसी आधार पर प्रचलित वाक्य-विन्यास लिखिए :
उदाहरण: तट पर एक गुलाब सोचता
एक गुलाब तट पर सोचता है।
हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की
बीमार बच्ची ने क्या इच्छा प्रकट की?
पिता सुखिया को कहाँ जाने से रोकता था और क्यों?
न्यायालय द्वारा सुखिया के पिता को क्यों दंडित किया गया?
सुखिया के पिता के अनुसार, भक्तगण देवी की गरिमा को किस तरह चोट पहुँचा रहे थे?
आदमी की प्रवृतियों का उल्लेख कीजिए।
निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए:
पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज़ यां
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ
‘आदमी नामा’ कविता का मूल कथ्य/प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
नज़ीर अकबराबादी ने आदमी के चरित्र की विविधता को किस तरह उभारा है?’आदमी नामा’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
हमें अपना दुख दूसरों पर क्यों नहीं प्रकट करना चाहिए? अपने मन की व्यथा दूसरों से कहने पर उनका व्यवहार कैसा हो जाता है?
‘अवध नरेश’ कहकर किसकी ओर संकेत किया गया है? उन्हें चित्रकूट में शरण क्यों लेनी पड़ी?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
दूसरे पद में कवि ने 'गरीब निवाजु' किसे कहा है? स्पष्ट कीजिए।
भक्त कवि कबीर, गुरु नानक, नामदेव और मीराबाई की रचनाओं का संकलन कीजिए।
रैदास द्वारा रचित दूसरे पद ‘ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै’ को प्रतिपाद्य लिखिए।
