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प्रश्न
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए −
तू न थमेगा कभी
तू न मुड़ेगा कभी
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उत्तर
इसका आशय यह है कि मनुष्य को कष्टों से भरे मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए कभी पीछे नहीं मुड़ना चाहिए। इस मार्ग पर केवल अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। उसके जीवन में अकर्मण्यता का कोई स्थान नहीं होना चाहिए क्योंकि आगे बढ़ते रहना ही उसके जीवन का लक्ष्य है। वह संघर्षों से भी न घबराए। वह सुख त्यागकर अग्निपथ को चुनौती देता रहे।
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इस कविता में से कुछ भाषिक प्रतीकोंबिंबों को छाँटकर लिखिए:
उदाहरण : अंधकार की छाया
(i) _______________
(ii) _______________
(iii) _______________
(iv) _______________
(v) _______________
‘एक फूल की चाह’ कविता की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
चारों छंदों में कवि ने आदमी के सकारात्मक और नकारात्मक रूपों को परस्पर किन-किन रूपों में रखा है? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
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उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए −
उदाहण : कोय − कोई , जे - जो
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ज्यों |
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कछु |
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नहिं |
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कोय |
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धनि |
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आखर |
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जिय |
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थोरे |
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होय |
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माखन |
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तरवारि |
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सींचिबो |
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मूलहिं |
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पिअत |
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पिआसो |
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बिगरी |
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आवे |
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सहाय |
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ऊबरै |
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बिनु |
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बिथा |
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अठिलैहैं |
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परिजाय |
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‘मिले गाँठ परिजाय’-ऐसा रहीम ने किस संदर्भ में कहा है और क्यों?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
दूसरे पद में कवि ने 'गरीब निवाजु' किसे कहा है? स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
दूसरे पद की 'जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
नीचे लिखी पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए :
जाकी अँग-अँग बास समानी
रैदास के पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
रैदास द्वारा रचित दूसरे पद ‘ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै’ को प्रतिपाद्य लिखिए।
