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प्रश्न
निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए:
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुन के दौड़ता है सो है वो भी आदमी
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उत्तर
इन काव्य पंक्तियों में निहित व्यंग्य यह है कि मनुष्य के विविध रूप हैं। एक व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए दूसरों का अपमान कर बैठता है तो कोई किसी को मदद के लिए पुकारता है। उसकी पुकार सुनते ही कोई दयावान उसकी मद्द के लिए भागा चला आता है। अत: मनुष्य में अच्छाई, बुराई दोनों ही हैं। यह उस पर निर्भर करता है कि वह किधर चल पड़े।
संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए:
'माँग मत', 'कर शपथ', इन शब्दों का बार-बार प्रयोग कर कवि क्या कहना चाहता है?
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए −
तू न थमेगा कभी
तू न मुड़ेगा कभी
इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।
एक पत्र छाँह भी माँग मत’ कवि ने ऐसा क्यों कहा है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए:
नदी का किनारों से कुछ कहते हुए बह जाने पर गुलाब क्या सोच रहा है? इससे संबंधित पंक्तियों को लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए:
'गीत-अगीत' के केंद्रीय भाव को लिखिए।
संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए −
गाता शुक जब किरण बसंत
छूती अंग पर्ण से छनकर
निम्नलिखित उदाहरण में 'वाक्य-विचलन'को समझने का प्रयास कीजिए। इसी आधार पर प्रचलित वाक्य-विन्यास लिखिए :
उदाहरण: तट पर एक गुलाब सोचता
एक गुलाब तट पर सोचता है।
हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
कविता की उन पँक्तियों को लिखिए, जिनसे निम्नलिखित अर्थ का बोध होता है −
1. सुखिया के बाहर जाने पर पिता का हृ्दय काँप उठता था।
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2. पर्वत की चोटी पर स्थित मंदिर की अनुपम शोभा।
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3. पुजारी से प्रसाद/फूल पाने पर सुखिया के पिता की मनःस्थिति।
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4. पिता की वेदना और उसका पश्चाताप।
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बीमार बच्ची ने क्या इच्छा प्रकट की?
पिता अपनी बच्ची को माता के प्रसाद का फूल क्यों न दे सका?
‘एक फूल की चाह’ कविता में देवी के भक्तों की दोहरी मानसिकता उजागर होती हैं। स्पष्ट कीजिए।
सुखिया को बाहर खेलते जाता देख उसके पिता की क्या दशा होती थी और क्यों?
निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए:
पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज़ यां
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
'नट' किस कला में सिद्ध होने के कारण ऊपर चढ़ जाता है?
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए :
सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय।
नीति संबंधी अन्य कवियों के दोहे/कविता एकत्र कीजिए और उन दोहों/कविताओं को चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।
नीचे लिखी पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए :
नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै
जैसे चितवत चंद चकोरा’ के माध्यम से रैदास ने क्या कहना चाहा है?
कवि रैदास ने ‘हरिजीउ’ किसे कहा है? काव्यांश के आधार पर ‘हरिजीउ’ की विशेषताएँ लिखिए।
