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इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।

टीपा लिहा
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उत्तर

इस कविता का मूलभाव है कि जीवन संघर्षों से भरा रहता है। इसमें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हर पल, हर पग पर चुनौतियाँ मिलती हैं परन्तु इन्हें स्वीकार करना चाहिए, इनसे घबरा कर पीछे नहीं हटना चाहिए, ना ही मुड़ कर देखना या किसी का सहारा लेना चाहिए। संकटों का सामना स्वयं ही करना चाहिए। बिना थके, बिना रूके, बिना हार माने इस जीवन पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

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पद्य (Poetry) (Class 9 B)
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रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय।


उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए −

उदाहण : कोय − कोई , जे - जो

ज्यों

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कछु

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नहिं

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कोय

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धनि

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आखर

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जिय

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थोरे

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होय

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माखन

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तरवारि

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सींचिबो

_______________

मूलहिं

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पिअत

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पिआसो

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बिगरी

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आवे

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सहाय

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ऊबरै

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बिनु

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बिथा

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अठिलैहैं

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परिजाय

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‘मिले गाँठ परिजाय’-ऐसा रहीम ने किस संदर्भ में कहा है और क्यों?


नट किस कला में पारंगत होता है? रहीम ने उसका उदाहरण किसलिए दिया है?


नीचे लिखी पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए :
जैसे चितवत चंद चकोरा


पाठ में आए दोनों पदों को याद कीजिए और कक्षा में गाकर सुनाइए।


‘तुम घन बन हम मोरा’-ऐसी कवि ने क्यों कहा है?


रैदास द्वारा रचित दूसरे पद ‘ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै’ को प्रतिपाद्य लिखिए।


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