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इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

इस कविता का मूलभाव क्या है? स्पष्ट कीजिए।

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उत्तर

इस कविता का मूलभाव है कि जीवन संघर्षों से भरा रहता है। इसमें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हर पल, हर पग पर चुनौतियाँ मिलती हैं परन्तु इन्हें स्वीकार करना चाहिए, इनसे घबरा कर पीछे नहीं हटना चाहिए, ना ही मुड़ कर देखना या किसी का सहारा लेना चाहिए। संकटों का सामना स्वयं ही करना चाहिए। बिना थके, बिना रूके, बिना हार माने इस जीवन पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।

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पद्य (Poetry) (Class 9 B)
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अध्याय 12: हरिवंशराय बच्चन - अग्नि पथ - प्रश्न अभ्यास [पृष्ठ १०५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 1 [English] Class 9
अध्याय 12 हरिवंशराय बच्चन - अग्नि पथ
प्रश्न अभ्यास | Q 2.2 | पृष्ठ १०५

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