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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता?

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प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता?

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उत्तर

प्रेम को जब चटकाकर अर्थात बिना सोचे समझे झटके में तोड़ दिया जाता है तो उसे पुन: जोड़ने पर उसकी स्थिति पहले जैसी नहीं रहती है। प्रेम विश्वास की डोर से बँधा होता है। यह डोर टूटने पर पुन: नहीं जुड़ पाता। इसमें अविश्वास और संदेह की दरार पड़ जाती है, गाँठ पड़ जाती है और अतंर आ जाता है।

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पद्य (Poetry) (Class 9 B)
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 8: रहीम - दोहे - प्रश्न अभ्यास [पृष्ठ ८०]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 1 [English] Class 9
अध्याय 8 रहीम - दोहे
प्रश्न अभ्यास | Q 1.1 | पृष्ठ ८०

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