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प्रश्न
अग्नि पथ’ कविता थके-हारे निराश मन को उत्साह एवं प्रेरणा से भर देती है। स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
मनुष्य का जीवन संघर्षों से भरा है। उसके जीवन पथ को कठिनाइयाँ एवं विघ्न-बाधाएँ और भी कठिन बना देते हैं। मनुष्य इनसे संघर्ष करते-करते थककर निराश हो जाता है। ऐसे थके-हारे और निराश मन को प्रेरणा और नई ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह कविता मनुष्य को संघर्ष करने की प्रेरणा ही नहीं देती है, वरन् जीवन पथ में मिलने वाली छाया देखकर न रुकने, सुख की कामना न करने तथा कठिनाइयों से हार न मानने का संदेश देती है। इसके अलावा इस कविता से हमें पसीने से लथपथ होने पर भी बढ़ते जाने के लिए प्रेरणा मिलती है। इससे स्पष्ट है कि अग्नि पथ कविता थके-हारे मन को उत्साह एवं प्रेरणा से भर देती है।
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पाठ में आए दोनों पदों को याद कीजिए और कक्षा में गाकर सुनाइए।
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