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प्रश्न
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए :
दीरघ दोहा अरथ के, आखर थोरे आहिं।
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उत्तर
कवि कहता है कि अच्छी वस्तु या ज्ञान थोड़ा सा ही पर्याप्त होता है। जिस प्रकार दोहे में अक्षर बहुत कम होते हैं परन्तु उसके अर्थ में गम्भीरता होती है, उसी प्रकार थोड़ा-सा ज्ञान भी अच्छा परिणाम देता है।
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उदाहरण: तट पर एक गुलाब सोचता
एक गुलाब तट पर सोचता है।
हुई न क्यों मैं कड़ी गीत की
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दूसरे पद की 'जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
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पहले पद की प्रत्येक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद-सौंदर्य आ गया है, जैसे- पानी, समानी आदि। इस पद में से अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।
रैदास के पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।
