Advertisements
Advertisements
प्रश्न
आपके विचार से मंदिर की पवित्रता और देवी की गरिमा को कौन ठेस पहुँचा रहा था और कैसे?
Advertisements
उत्तर
मेरे विचार से तथाकथित उच्च जाति के भक्तगण मंदिर की पवित्रता और देवी की गरिमा को ठेस पहुँचा रहे थे, सुखिया का पिता नहीं, क्योंकि वे जातीय आधार पर सुखिया के पिता को अपमानित करते हुए देवी के सामने ही मार-पीट रहे थे। वे जिस देवी की गरिमा नष्ट होने की बात कर रहे थे, वह तो स्वयं पतित पाविनी हैं तो एक पतित के आने से न तो देवी की गरिमा नष्ट हो रही थी और न मंदिर की पवित्रता। ऐसा सोचना उन तथाकथित उच्च जाति के भक्तों की संकीर्ण सोच और अमानवीयता थी।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर दीजिए:
नए बसते इलाके में कवि रास्ता क्यों भूल जाता है?
कवि ‘एक पत्र छाँह’ भी माँगने से मना करता है, ऐसा क्यों?
सभी कुछ गीत है, अगीत कुछ नहीं होता। कुछ अगीत भी होता है क्या? स्पष्ट कीजिए।
प्रकृति अपने विभिन्न क्रिया-कलापों से मनुष्य को प्रभावित करती है। ‘गीत-अगीत’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
बीमार बच्ची ने क्या इच्छा प्रकट की?
निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट करते हुए उनका अर्थ-सौंदर्य बताइए −
हाय! वही चुपचाप पड़ी थी
अटल शांति-सी धारण कर
‘एक फूल की चाह’ कविता में देवी के भक्तों की दोहरी मानसिकता उजागर होती हैं। स्पष्ट कीजिए।
सुखिया को बाहर खेलते जाता देख उसके पिता की क्या दशा होती थी और क्यों?
सुखिया के पिता को मंदिर में देखकर भक्तों ने क्या-क्या कहना शुरू कर दिया?
इस कविता का कौन-सा भाग आपको सबसे अच्छा लगा और क्यों?
निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए:
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुन के दौड़ता है सो है वो भी आदमी
आदमी किन स्थितियों में पीर बन जाता है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नहीं कर पाता?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
अवध नरेश को चित्रकूट क्यों जाना पड़ा?
रहीम ने अपने दोहों में छोटी वस्तुओं का महत्त्व प्रतिपादित किया है। इसे सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
पहले पद की प्रत्येक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद-सौंदर्य आ गया है, जैसे- पानी, समानी आदि। इस पद में से अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।
नीचे लिखी पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए :
नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै
पठित पद के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि रैदास की उनके प्रभु के साथ अटूट संबंध हैं।
