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‘एक फूल की चाह’ कविता की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

‘एक फूल की चाह’ कविता की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।

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उत्तर

प्राचीन समय से ही भारतीय समाज वर्गों में बँटा है। यहाँ समाज के एक वर्ग द्वारा स्वयं को उच्च तथा दूसरे को निम्न और अछूत समझा जाता है। इस वर्ग का देवालयों में प्रवेश आदि वर्जित है, जो सरासर गलत है। सुखिया का पिता भी जाति-पाति का बुराई का शिकार हुआ था। यह कविता हम सभी को समान समझने, ऊँच-नीच, छुआछूत आदि सामाजिक बुराइयों को नष्ट करने की प्रेरणा देती है। अत: यह कविता पूर्णतया प्रासंगिक है।

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पद्य (Poetry) (Class 9 B)
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अध्याय 10: सियारामशरण गुप्त - एक फूल की चाह - अतिरिक्त प्रश्न

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 1 [English] Class 9
अध्याय 10 सियारामशरण गुप्त - एक फूल की चाह
अतिरिक्त प्रश्न | Q 10

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ज्यों

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कछु

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नहिं

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कोय

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धनि

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आखर

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जिय

_______________

थोरे

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होय

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माखन

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तरवारि

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सींचिबो

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मूलहिं

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पिअत

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पिआसो

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बिगरी

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आवे

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सहाय

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ऊबरै

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बिनु

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बिथा

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अठिलैहैं

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परिजाय

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