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निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :दूसरे पद की 'जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

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प्रश्न

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
दूसरे पद की 'जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै' इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

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उत्तर

'जाकी छोति जगत कउ लागै' का अर्थ है जिसकी छूत संसार के लोगों को लगती है और 'ता पर तुहीं ढरै' का अर्थ है उन पर तू ही (दयालु) द्रवित होता है। पूरी पंक्ति का अर्थ है गरीब और निम्नवर्ग के लोगों को समाज सम्मान नहीं देता। उनसे दूर रहता है। परन्तु ईश्वर कोई भेदभाव न करके उन पर दया करते हैं, उनकी मद्द करते हैं, उनकी पीड़ा हरते हैं।

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पद्य (Poetry) (Class 9 B)
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अध्याय 7: रैदास - अब कैसे छूटे राम नाम … ऐसी लाल तुझ बिनु … - प्रश्न अभ्यास [पृष्ठ ७५]

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एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 1 Class 9
अध्याय 7 रैदास - अब कैसे छूटे राम नाम … ऐसी लाल तुझ बिनु …
प्रश्न अभ्यास | Q 1.5 | पृष्ठ ७५

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