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प्रश्न
‘तुम घन बन हम मोरा’-ऐसी कवि ने क्यों कहा है?
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उत्तर
रैदास अपने प्रभु के अनन्य भक्त हैं, जिन्हें अपने आराध्य को देखने से असीम खुशी मिलती है। कवि ने ऐसा इसलिए कहा है, क्योंकि जिस प्रकार वन में रहने वाला मोर आसमान में घिरे बादलों को देख प्रसन्न हो जाता है, उसी प्रकार कवि भी अपने आराध्य को देखकर प्रसन्न होता है।
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उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए −
उदाहण : कोय − कोई , जे - जो
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ज्यों |
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कछु |
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नहिं |
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कोय |
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धनि |
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आखर |
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जिय |
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थोरे |
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होय |
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माखन |
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तरवारि |
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सींचिबो |
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मूलहिं |
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पिअत |
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पिआसो |
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बिगरी |
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आवे |
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सहाय |
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ऊबरै |
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बिनु |
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बिथा |
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अठिलैहैं |
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परिजाय |
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