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निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए:पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज़ यांऔर आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ

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प्रश्न

निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए:
पढ़ते हैं आदमी ही कुरआन और नमाज़ यां
और आदमी ही उनकी चुराते हैं जूतियाँ

टीपा लिहा
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उत्तर

इन पंक्तियों में अभिव्यक्त व्यंग्य यह है व्यक्ति-व्यक्ति की रूचि और कार्यों में अंतर होता है। मनुष्य अच्छा बनने पर आए तो वह कुरआन पढ़ने वाला और नमाज़ अदा करने वाला सच्चा धार्मिक भी बन सकता है और यदि वह दुष्टता पर आए तो वह जूतियाँ चुराने वाला भी बन सकता है। कुछ लोग बुराई पर नज़र रखने वाले भी होते हैं। इन सभी कामों को करने वाले आदमी ही तो हैं। मनुष्य के स्वभाव में अच्छाई बुराई दोनों होते हैं परन्तु वह किधर चले यह उस पर ही निर्भर करता है।

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पद्य (Poetry) (Class 9 B)
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 9: नज़ीर अकबराबादी - आदमी नामा - प्रश्न अभ्यास [पृष्ठ ८५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi Sparsh Bhag 1 Class 9
पाठ 9 नज़ीर अकबराबादी - आदमी नामा
प्रश्न अभ्यास | Q 3.1 | पृष्ठ ८५

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