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प्रश्न
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए:
'एक पत्र-छाँह भी माँग मत' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
'एक पत्र छाह भी माँग मत' − पंक्ति का आशय है कि मनुष्य अपनी प्रकृति के अनुसार माँगने लगता है और अपनी परिस्थितियों से घबराकर दूसरों की सहायता माँगने लगता है। इससे उसका आत्मविश्वास कम होने लगता है। इसलिए अपनी कठिनाइयों का सामना स्वयं ही करना चाहिए। यदि थोड़ा भी आश्रय मिल जाए तो उसकी अवहेलना न करके धन्य मानना चाहिए।
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प्रकृति के साथ पशु-पक्षियों के संबंध की व्याख्या कीजिए।
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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए −
अपने पतझर के सपनों का
मैं भी जग को गीत सुनाता
संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए −
गाता शुक जब किरण बसंत
छूती अंग पर्ण से छनकर
प्रकृति अपने विभिन्न क्रिया-कलापों से मनुष्य को प्रभावित करती है। ‘गीत-अगीत’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
इस कविता में से कुछ भाषिक प्रतीकोंबिंबों को छाँटकर लिखिए:
उदाहरण : अंधकार की छाया
(i) _______________
(ii) _______________
(iii) _______________
(iv) _______________
(v) _______________
निम्नलिखित पंक्ति का आशय स्पष्ट करते हुए उनका अर्थ-सौंदर्य बताइए −
बुझी पड़ी थी चिता वहाँ पर
छाती धधक उठी मेरी
तत्कालीन समाज में व्याप्त स्पृश्य और अस्पृश्य भावना में आज आए परिवर्तनों पर एक चर्चा आयोजित कीजिए।
मंदिर की भव्यता और सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
सुखिया का पिता किस सामाजिक बुराई का शिकार हुआ?
सुखिया के पिता के अनुसार, भक्तगण देवी की गरिमा को किस तरह चोट पहुँचा रहे थे?
निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए:
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुन के दौड़ता है सो है वो भी आदमी
नीचे लिखे शब्दों का उच्चारण कीजिए और समझिए कि किस प्रकार नुक्ते के कारण उनमें अर्थ परिवर्तन आ गया है।
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राज़ (रहस्य) |
फ़न (कौशल) |
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राज (शासन) |
फन (साँप का मुहँ) |
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ज़रा (थोड़ा) |
फ़लक (आकाश) |
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जरा (बुढ़ापा) |
फलक (लकड़ी का तख्ता) |
ज़ फ़ से युक्त दो-दो शब्दों को और लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
प्रेम का धागा टूटने पर पहले की भाँति क्यों नहीं हो पाता?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
जलहीन कमल की रक्षा सूर्य भी क्यों नहीं कर पाता?
निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए :
नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत।
नीचे लिखी पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए :
नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै
रैदास द्वारा रचित ‘अब कैसे छूटे राम नाम रट लागी’ को प्रतिपाद्य लिखिए।
