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Question
बताओ तुम ये काम कैसे करोगे? शिक्षक से भी सहायता लो।
तारों की चाल बदल देना
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Solution
इतना परिश्रम करेंगे कि भाग्य को भी अपने हाथों चलने पर विवश कर देंगे। अपने परिश्रम से हम अपना भाग्य स्वयं बनाएँगे।
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RELATED QUESTIONS
बहुविकल्पी प्रश्न
कवि अपनी कविता के माध्यम से आह्वान कर रहा है
बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
कठपुतलियों को किनसे परेशानी थी?
बहुविकल्पी प्रश्न
कवि देशवासियों को कैसी तान सुनाना चाहता है?
इस पंक्ति से बारिश के बारे में क्या पता चलता है?
| नमूना → | सूरज की माँ ने उसको बुला लिया। |
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ऐसा लगता है कि आसमान में सूरज नज़र नहीं आ रहा होगा। |
आँगन में तलवार चल रही है।
यह कविता आज़ादी मिलने से पहले के समय में लिखी गई थी। उस समय हमारे देश पर अंग्रेज़ों का राज था। किन पंक्तियों से पता चलता है कि लड़का/लड़की के काका स्वतंत्रता सेनानी थे?
नीचे कविता में से पंक्ति दी गई हैं। कविता की अगली पंक्ति स्वयं बनाओ। ध्यान रखो, कविता में से देखकर नहीं लिखना।
| नमूना → | ज़ोर - ज़ोर से गरज रहे है। |
| तड़ तड़ तड़ तड़ बरस रहे है। |
किसने फोड़ घड़े बादल के
कई बार जब दो शब्द आपस में जुड़ते हैं तो उनके मूल रूप में परिवर्तन हो जाता है। कठपुतली शब्द में भी इस प्रकार का सामान्य परिवर्तन हुआ है। जब काठ और पुतली दो शब्द एक साथ हुए कठपुतली शब्द बन गया और इससे बोलने में सरलता आ गई। इस प्रकार के कुछ शब्द बनाइए-
जैसे-काठ (कठ) से बना-कठगुलाब, कठफोड़ा
| हाथ-हथ | सोना-सोन | मिट्टी-मट |
बहुविकल्पी प्रश्न
कौन-सी अँगीठी दहक रही है?
अंधकार दूर सिमटा कैसा लग रहा है?
बहुविकल्पी प्रश्न
“संपति सगे’ में किस अलंकार का प्रयोग हुआ है?
जीवन में मित्रों की अधिकता कब होती है?
वृक्ष और सरोवर किस प्रकार दूसरों की भलाई करते हैं?
इस कविता को कवि ने ‘मैं’ से आरंभ किया है- ‘मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ’। कवि का यह ‘मैं’ कविता पढ़ने वाले व्यक्ति से भी जुड़ सकता है और तब अनुभव यह होगा कि कविता पढ़ने वाला व्यक्ति अपनी बात बता रहा है। यदि कविता में ‘मैं’ की जगह ‘वह’ या कोई नाम लिख दिया जाए, तब कविता के वाक्यों में बदलाव की जाएगा। कविता में ‘मैं’ के स्थान पर ‘वह’ या कोई नाम लिखकर वाक्यों के बदलाव को देखिए और कक्षा में पढ़कर सुनाइए।
नीचे दी गई कबीर की पंक्तियों में तिनका शब्द का प्रयोग एक से अधिक बार किया गया है। इनके अलग-अलग अर्थों की जानकारी प्राप्त करें।
उठा बबूला प्रेम का, तिनका उड़ा अकास।
तिनका-तिनका हो गया, तिनका तिनके पास॥
स्वाधीनता संग्राम के दिनों में अनेक कवियों ने स्वाधीनता को मुखर करने वाली ओजपूर्ण कविताएँ लिखीं। माखनलाल चतुर्वेदी, मैथिलीशरण गुप्त और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ऐसी कविताओं की चार-चार पंक्तियाँ इकट्ठा कीजिए जिनमें स्वाधीनता के भावे ओज से मुखर हुए हैं।
बहुविकल्पी प्रश्न
तिनका कहाँ आ गिरा?
तिनकेवाली घटना से कवि को क्या प्रेरणा मिली?
बहुविकल्पी प्रश्न
ग्वाल-बालकों के हाथ में क्या है?
कवि बाग-बगीचा क्यों लगाना चाहता है?
नीचे कविता में से पंक्ति दी गई हैं। कविता की अगली पंक्ति स्वयं बनाओ। ध्यान रखो, कविता में से देखकर नहीं लिखना।
| नमूना → | ज़ोर - ज़ोर से गरज रहे है। |
| तड़ तड़ तड़ तड़ बरस रहे है। |
तब माँ कोई कर न सकेगा
