मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (इंग्रजी माध्यम) इयत्ता १० वी

‘जल है तो कल है’ विषय पर अस्‍सी से सौ शब्‍दों में निबंध लिखिए। - Hindi (Second/Third Language) [हिंदी (दूसरी/तीसरी भाषा)]

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘जल है तो कल है’ विषय पर अस्‍सी से सौ शब्‍दों में निबंध लिखिए।

निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:

जल है तो कल है।

लेखन कौशल्य
Advertisements

उत्तर

जल है तो कल है

हमारी प्राचीन मान्यता के अनुसार जल को तत्त्व माना गया है। जल के बिना जीवन एवं जीवन से जुड़ी किसी भी आवश्यकता की पूर्ति के बारे में कल्पना भी कठिन है। हमारी रोज की जरूरतें और सारे काम जल से ही शुरू होते हैं। पृथ्वी का 70 % प्रतिशत भाग पानी से घिरा हुआ है। जल के बिना धरती पर मानव एवं पशु-पक्षियों का जीवन संभव नहीं है। वस्तुतः जल ही जीवन है। नदी, तालाब, नहर, कुआँ आदि जल के ही वरदान हैं।

जल से ही खाने योग्य वस्तुएँ पैदा होती हैं। यदि वर्षा न हो, तो इस धरती का आँचल सुख जाएगा। जल के बिना सभी जीवों का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। वर्तमान समय में धरती की बढ़ती आबादी के कारण पानी के संसाधनों में कमी होती जा रही है। यह आने वाले समय के लिए एक गंभीर समस्या है। जल के संकट को ध्यान में रखते हुए यह कहा जा सकता है कि भविष्य में पानी के लिए युद्ध होना तय है। जल प्रदूषण के कारण जल में रहने वाले अनेकों जीव-जंतु मर रहे हैं। लोग लाखों की गिनती में जल प्रदूषण के कारण बीमार हो रहे हैं।

जल संकट को दूर करने के लिए हमें ही आगे आना होगा और उसके लिए हमें जल संसाधनों की रक्षा करनी होगी। साथ ही लोगों को भी इसके लिए जागरूक करना होगा। नदी-तालाब आदि का रख-रखाव करना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त हमें जल के दुरूपयोग व अपव्यव पर भी रोक लगानी होनी। यदि हम धरती को बचाना और पर्यावरण को संतुलित रखना चाहते हैं, तो हमें बिना देर किए जल को बचाने के हर संभव प्रयास करने होंगे। लोगों को समझना होगा कि यदि जल नहीं होगा, तो हमारा जीवन भी नहीं बचेगा, क्योंकि जल है तो कल है।

shaalaa.com
निबंध लेखन
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.08: बातचीत - उपयोजित लेखन [पृष्ठ ९८]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 10 Maharashtra State Board
पाठ 2.08 बातचीत
उपयोजित लेखन | Q १. | पृष्ठ ९८

संबंधित प्रश्‍न

किसी पालतू प्राणी की आत्‍मकथा लिखिए।


कल्पनाप्रधान निबंध: यदि श्यामपट बोलने लगा......


कल्पनाप्रधान निबंध: यदि किताबें न होतीं


चरित्रात्मक निबंध: मेरे आदर्श


आत्मकथात्मक निबंध: भूमिपुत्र की आत्मकथा


आत्मकथात्मक निबंध: मैं हूँ भाषा


‘बुरी संगति किसी को भी दिशाहीन बना सकती है’ इसपर तर्क सहित अपने विचार लिखिए।


‘मोबाइल के अति उपयोग से होने वाले दुष्‍परिणाम’ विषय पर अपने विचार लिखिए।


‘वर्तमान समय में शांति के क्षेत्र में/पर्यावरण संरक्षण में भारत की भूमिका का महत्‍त्‍व’ विषय पर अस्‍सी से सौ शब्‍दों में निबंध लेखन कीजिए।


‘देश की उन्नति में युवाओं का योगदान’ विषय पर अपने विचारों की मौखिक तथा लिखित अभिव्यक्‍ति कीजिए।


निम्नलिखित विषय पर लगभग ८० से १०० शब्दों में निबंध लिखिए:

मेरा भारत देश


निम्नलिखित विषय पर लगभग ८० से १०० शब्दों में निबंध लिखिए:

पर्यावरण संतुलन


निम्नलिखित दिए गए शीर्षक पर लगभग 150 शब्दों में रचनात्मक लेखन लिखिए।

मेरे बगीचे में खिला गुलाब


निम्नलिखित विषय पर लगभग 70 से 80 शब्दों में निबंध लिखिए:

मैं पृथ्वी बोल रही हूँ...


निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:

मैं सड़क बोल रही हूँ......


निबंध लेखन:

मेरा प्रिय खिलाड़ी


निबंध लिखिए:

घायल सैनिक की आत्मकथा


निम्नलिखित दिए गए शीर्षक पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।

मैच खेलने का अवसर


नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।

दिया और तूफ़ान : मानव जीवन का सत्य


नीचे दिए गए अप्रत्याशित विषय पर लगभग 120 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए।

आज़ादी का अमृत महोत्सव: स्वर्णिम 75 साल


निबंध लिखिए -

आतंकवाद


निबंध लिखिए -

यदि मैं प्रधानमंत्री होता।


निबंध लिखिए -

जल संचयन


निम्नलिखित विषय पर लगभग (80-100) शब्दों में निबंध लिखिए।

स्वच्छता


निम्नलिखित विषय पर 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए।

मेरा प्रिय खेल


निम्नलिखित विषय पर लगभग 80 से 100 शब्दों में निबंध लिखिए:

फटी पुस्तक की आत्मकथा


‘प्रदूषण मुक्‍त त्‍योहार’ इस विषय पर निबंध लिखिए।


‘मैं लाल किला बोल रहा हूँ...’ निबंध लिखिए।


दैनंदिनी (डायरी) तुमच्याशी बोलत आहे, अशी कल्पना करून तिचे आत्मकथन पुढील मुद्‌द्यांचा उपयोग करून लिहा.

  1. निर्मिती
  2. महत्त्व
  3. उपयोग
  4. इतरांची भावना
  5. आनंद
  6. खंत

पुढील घटक (फूल) तुमच्याशी बोलत आहे, अशी कल्पना करून त्या घटकाचे (फुलाचे) आत्मवृत्त लिहा.


‘करत-करत अभ्‍यास के जड़मति होत सुजान’ इस विषय पर भाषाई सौंदर्यवाले वाक्‍यों, सुवचन, दोहे आदि का उपयोग करके निबंध/कहानी लिखिए ।


रामवृक्ष बेनीपुरी द्‍वारा लिखित ‘गेंहूँ बनाम गुलाब’ निबंध पढ़िए और उसका आकलन कीजिए ।


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×