मराठी
महाराष्ट्र राज्य शिक्षण मंडळएस.एस.सी (हिंदी माध्यम) इयत्ता १० वी

‘परिवेश का प्रभाव व्यक्‍तित्‍व पर होता है’ आपके विचार लिखिए। - Hindi [हिंदी]

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

‘परिवेश का प्रभाव व्यक्‍तित्‍व पर होता है’ आपके विचार लिखिए।

टीपा लिहा
Advertisements

उत्तर

इस पाठ में लेखिका शिवानी का परिवार में पठन-पाठन का वातावरण था। लेखिका बचपन से पढ़ने-लिखने के आलावा उनका ध्यान किसी और बात की तरफ नहीं गया। लेखिका की माँ गुजराती ओर संस्कृत की विदुषी थीं और पिता जी अंग्रेजी के विद्वान थे। लेखिका का घर गुजरात में साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र माना जाता था।में इस बात से पूरी सहमत हूँ की व्यक्ति के परिवेश का उसके व्यक्तित्व पर तो निश्चित रूप से प्रभाव पड़ता है। लेखिका शिवानी के परिवेश का भी उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है।

shaalaa.com
बातचीत
  या प्रश्नात किंवा उत्तरात काही त्रुटी आहे का?
पाठ 2.08: बातचीत - स्‍वाध्याय [पृष्ठ ९८]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Kumarbharati [Hindi] Standard 10 Maharashtra State Board
पाठ 2.08 बातचीत
स्‍वाध्याय | Q (८) | पृष्ठ ९८

संबंधित प्रश्‍न

संजाल पूर्ण कीजिए :


पाठ (बातचीत) में प्रयुक्‍त शिवानी की रचनाओं के नामों की सूची तैयार कीजिए।


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
          मैं चाय नहीं पीता।

मोहन क्रिकेट खेलता है। (फुटबाल) 


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

शीला गाना गाती है।(नाचना)


हम सुबह ______ स्नान करते हैं।


मैं सुबह ______ स्कूल जाता हूँ।


हम दिन में ______ खाते हैं।


हम रात में ______ सोते हैं।


अध्यापिका हिंदी कैसे पढ़ाती हैं? 


निम्नलिखित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

दुर्गा प्र. नौटियालः  आपने अब तक काफी साहित्‍य रचा है। क्‍या आप इससे संतुष्‍ट हैं? 
शिवानी: जहाँ तक संतुष्‍ट होने का संबंध है, मैं समझती हूँ कि किसी को भी अपने लेखन से संतुष्‍ट नहीं होना चाहिए। मैं चाहती हूँ कि ऐसे लक्ष्य को सामने रखकर कुछ ऐसा लिखूँ कि जिस परिवेश को पाठक ने स्‍वयं भोगा है, उसे जीवंत कर दूँ। मुझे तब बहुत ही अच्छा लगता है जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि आपने अमुक-अमुक चरित्र का वास्‍तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है। लेकिन साथ ही मैं यह मानती हूँ कि लोकप्रिय होना न इतना आसान है और न ही उसे बनाए रखना आसान है। मैं गत पचास वर्षों से बराबर लिखती आ रही हूँ। पाठक मेरे लेखन को खूब सराह रहे हैं। मेरे असली आलोचक तो मेरे पाठक हैं, जिनसे मुझे प्रशंसा और स्‍नेह भरपूर मात्रा में मिलता रहा है। शायद यही कारण है कि मैं अब तक बराबर लिखती आई हूँ।
  1. कृति पूर्ण कौजिए:   (2)



  2. 'परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है' विषय 25 से 30 शब्दों अपने विचार लिखिए।   (2)

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×