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प्रश्न
कारण लिखिए :
शिवानी जी को पाठकों से प्रशंसा प्राप्त हुई है ______
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उत्तर
लेखिका चाहती हैं कि वे ऐसा कुछ लिखें, जिसे पाठक ने स्वयं भोगा हों, क्योंकि उसे तब बहुत अच्छा लगता है, जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि अमुक-अमुक चरित्र का आपने वास्तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है |
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संबंधित प्रश्न
जोड़ियाँ मिलाइए :
| अ | उत्तर | आ |
| धर्मयुग | ______ | मारिचिका |
| सोनार बाँग्ला | ______ | अंग्रेजी लेख |
| एशिया | ______ | पहली रचना |
| नटखट | ______ | मैं मुर्गा हूँ |
लिखिए :
पढ़ो और बोलो
| सहेली | विद्यालय | बुद्धि का खेल | कभी-कभी | सीखना | व्यायाम |
| सुबह | भागना | चाचा जी | अंत्याक्षरी | दिन में | याद करना |
| मामा जी | चैतरै | शाम को दौड़ना | अध्यापिका | प्रधान डाकघर |
पढ़ो और समझो
| पुल्लिंग | स्त्रीलिंग | |
| मैं | पढ़ता हूँ। गाता हूँ। |
पढ़ती हूँ। गाती हूँ। |
| तुम | खेलते हो। खाते हो। |
खेलती हो। खाती हो। |
| हम | सीखते हैं। | सीखती हो। |
| आप | सुनते हैं। | सुनती हो। |
कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।
पुल्लिंग:
मैं दूध ______ (पी)
कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।
पुल्लिंग:
तुम केला ______ (खा)
कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो। पुल्लिंग:
हम विद्यालय ______ (जाना)
नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।
नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।
माताजी जी रोज़ दूध पीती हैं। (चाय)
तुम्हारा विद्यालय कहाँ है?
निम्नलिखित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
| दुर्गा प्र. नौटियालः | आपने अब तक काफी साहित्य रचा है। क्या आप इससे संतुष्ट हैं? |
| शिवानी: | जहाँ तक संतुष्ट होने का संबंध है, मैं समझती हूँ कि किसी को भी अपने लेखन से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। मैं चाहती हूँ कि ऐसे लक्ष्य को सामने रखकर कुछ ऐसा लिखूँ कि जिस परिवेश को पाठक ने स्वयं भोगा है, उसे जीवंत कर दूँ। मुझे तब बहुत ही अच्छा लगता है जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि आपने अमुक-अमुक चरित्र का वास्तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है। लेकिन साथ ही मैं यह मानती हूँ कि लोकप्रिय होना न इतना आसान है और न ही उसे बनाए रखना आसान है। मैं गत पचास वर्षों से बराबर लिखती आ रही हूँ। पाठक मेरे लेखन को खूब सराह रहे हैं। मेरे असली आलोचक तो मेरे पाठक हैं, जिनसे मुझे प्रशंसा और स्नेह भरपूर मात्रा में मिलता रहा है। शायद यही कारण है कि मैं अब तक बराबर लिखती आई हूँ। |
- कृति पूर्ण कौजिए: (2)
- 'परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है' विषय 25 से 30 शब्दों अपने विचार लिखिए। (2)


