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Question
कारण लिखिए :
शिवानी जी को पाठकों से प्रशंसा प्राप्त हुई है ______
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Solution
लेखिका चाहती हैं कि वे ऐसा कुछ लिखें, जिसे पाठक ने स्वयं भोगा हों, क्योंकि उसे तब बहुत अच्छा लगता है, जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि अमुक-अमुक चरित्र का आपने वास्तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है |
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पाठ (बातचीत) में प्रयुक्त शिवानी की रचनाओं के नामों की सूची तैयार कीजिए।
‘परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है’ आपके विचार लिखिए।
कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।
पुल्लिंग:
मैं दूध ______ (पी)
नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।
नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।
पिता जी सवेरे टहलते हैं। (तैरते)
नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।
नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।
माताजी जी रोज़ दूध पीती हैं। (चाय)
हम दिन में ______ खाते हैं।
मैं शाम को ______ क्रिकेट खेलता हूँ।
अध्यापिका हिंदी कैसे पढ़ाती हैं?
शोभा कौन-से खेल खेलती है?
निम्नलिखित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
| दुर्गा प्र. नौटियालः | आपने अब तक काफी साहित्य रचा है। क्या आप इससे संतुष्ट हैं? |
| शिवानी: | जहाँ तक संतुष्ट होने का संबंध है, मैं समझती हूँ कि किसी को भी अपने लेखन से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। मैं चाहती हूँ कि ऐसे लक्ष्य को सामने रखकर कुछ ऐसा लिखूँ कि जिस परिवेश को पाठक ने स्वयं भोगा है, उसे जीवंत कर दूँ। मुझे तब बहुत ही अच्छा लगता है जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि आपने अमुक-अमुक चरित्र का वास्तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है। लेकिन साथ ही मैं यह मानती हूँ कि लोकप्रिय होना न इतना आसान है और न ही उसे बनाए रखना आसान है। मैं गत पचास वर्षों से बराबर लिखती आ रही हूँ। पाठक मेरे लेखन को खूब सराह रहे हैं। मेरे असली आलोचक तो मेरे पाठक हैं, जिनसे मुझे प्रशंसा और स्नेह भरपूर मात्रा में मिलता रहा है। शायद यही कारण है कि मैं अब तक बराबर लिखती आई हूँ। |
- कृति पूर्ण कौजिए: (2)
- 'परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है' विषय 25 से 30 शब्दों अपने विचार लिखिए। (2)


